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Saturday, September 6, 2014

मै राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इसलिए नहीं जुड़ा हुआ हूँ वाल्यकाल से की उसकी नीव किशी से डॉ ने डाली और हर डॉ उसका नाजायज श्रेय ले पर इस लिए की उसका ध्वज भगवा (जिसमे इस्वर की भक्ति और शक्ति समाहित हो) ध्वज है जो उनका गुरु होता है जिसकी वे वन्दना करते हैं हर कार्य के अंत में और भगवा सूर्य की अरुणिमा का प्रकाश है जिसमे सभी रंग जीवन के होते है और सूर्य ही एक मात्र स्रोत है जीवन का इस्वर की शक्ति और वैभव का स्वरुप है भगवा। और यही नहीं तिरंगा के केशरिया, सफेद और हरा को मिलाएंगे तो भगवा रंग ही मिलेगा मतलब यह भगवा तिरंगा का जन्म दाता और शक्ति है। >>>>>>>मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।

मै राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इसलिए नहीं जुड़ा हुआ हूँ वाल्यकाल से की उसकी नीव किशी से डॉ ने डाली और हर डॉ उसका नाजायज श्रेय ले पर इस लिए की उसका ध्वज भगवा (जिसमे इस्वर की भक्ति और शक्ति समाहित हो) ध्वज है जो उनका गुरु होता है जिसकी वे वन्दना करते हैं हर कार्य के अंत में और भगवा सूर्य की अरुणिमा का प्रकाश है जिसमे सभी रंग जीवन के होते है और सूर्य ही एक मात्र स्रोत है जीवन का इस्वर की शक्ति और वैभव का स्वरुप है भगवा। और यही नहीं तिरंगा के केशरिया, सफेद और हरा को मिलाएंगे तो भगवा रंग ही मिलेगा मतलब यह भगवा तिरंगा का जन्म दाता और शक्ति है। >>>>>>>मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।

मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।---------- मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

>>>>>>मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।----------
मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

राजर्षि(तमो गुण:शक्ति -सत्ता और उस हेतु बलिदान ) और महर्षि(रजो गुन=उद्यम-समृद्धि और उस हेतु तपस्या और प्रयत्न) का द्वार खोलने वाले विश्वामित्र:कौसिक:विश्वरथ स्वयं एक सप्तर्षि मतलब सात मूल ब्रह्मर्षियों(सतो गुण: सत्य, शान्ति और सादगी तथा उस हेतु अपने स्वार्थमय जीवन की किशी जैविक और भौतिक वस्तु, और मान-सामान का त्याग) में से एक थे। और इस प्रकार विश्वामित्र स्वयं में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य जैसे गुणों से संपन्न ब्रह्मा, शिव और विष्णु के रूप से इस्वर को देखने की दृस्टि की सुरुआत की। और यही है त्रिदेव को जानने का मूल मंत्र उस ब्रह्मर्षि के जीवन दर्शन से प्राप्त हुए जिसने गायत्री मंत्र को सिद्ध करते हुए इसे विश्व को समर्पित किया और जिसको सिद्ध करने वाले अंतिम ऋषि याज्ञवल्क हुए जो अशोक चक्र के चौबीसवें स्तम्भ हैं जिसके की विश्वामित्र ही पहले स्तम्भ है। सूर्य की उपासना मंत्र में भी सूर्य की पत्नी सविता/गायत्री को सम्मान देते हुए इसका नाम गायत्री/सविता मंत्र दिया। अतः प्रकार हमारे समाज में नारी का ऐसा सम्मान अनादिकाल से चला आ रहा है। और नारी को ही सूर्य की ऊर्जा का स्रोत(गायत्री/सविता) माना है विश्वामित्र जैसे सात मूल ब्रह्मर्षियों में से एक ब्रह्मर्षि ने। आइये हम नारी शक्ति का संवर्धन करे जिससे की तेजस्वी समाज का निर्माण हो सके और वह समाज विनम्र भी होगा अगर बचपन से लेकर युवावस्था तक सुलभ सृजनात्मक मातृत्व भाव से पूर्ण योग्य नारी जीवन की वात्सल्य छाया जिसपर पडी हो और इस प्रकार शान्तिमय समाज की स्थापना श्रेष्ठ स्त्री समाज के निर्माण से ही संभव होगा।

राजर्षि(तमो गुण:शक्ति -सत्ता और उस हेतु बलिदान ) और महर्षि(रजो गुन=उद्यम-समृद्धि और उस हेतु तपस्या और प्रयत्न) का द्वार खोलने वाले विश्वामित्र:कौसिक:विश्वरथ स्वयं एक सप्तर्षि मतलब सात मूल ब्रह्मर्षियों(सतो गुण: सत्य, शान्ति और सादगी तथा उस हेतु अपने स्वार्थमय जीवन की किशी जैविक और भौतिक वस्तु, और मान-सामान का त्याग) में से एक थे। और इस प्रकार विश्वामित्र स्वयं में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य जैसे गुणों से संपन्न ब्रह्मा, शिव और विष्णु  के रूप से इस्वर को देखने की दृस्टि की सुरुआत की। और यही है त्रिदेव को जानने का मूल मंत्र उस ब्रह्मर्षि के जीवन दर्शन से प्राप्त हुए जिसने गायत्री मंत्र को सिद्ध करते हुए इसे विश्व को समर्पित किया और जिसको सिद्ध करने वाले अंतिम ऋषि याज्ञवल्क हुए जो अशोक चक्र के चौबीसवें स्तम्भ हैं जिसके की विश्वामित्र  ही पहले स्तम्भ है। सूर्य की उपासना मंत्र में भी सूर्य की पत्नी सविता/गायत्री को सम्मान देते हुए इसका नाम गायत्री/सविता मंत्र दिया। अतः  प्रकार हमारे समाज में नारी का ऐसा सम्मान अनादिकाल से चला आ रहा है। और नारी को ही सूर्य की ऊर्जा का स्रोत(गायत्री/सविता) माना है विश्वामित्र जैसे सात मूल ब्रह्मर्षियों में से एक ब्रह्मर्षि ने। आइये हम नारी शक्ति का संवर्धन करे जिससे की तेजस्वी समाज का निर्माण हो सके और वह समाज विनम्र भी होगा अगर बचपन से लेकर युवावस्था तक सुलभ सृजनात्मक मातृत्व भाव से पूर्ण योग्य नारी जीवन की वात्सल्य छाया जिसपर पडी हो और इस प्रकार शान्तिमय समाज की स्थापना श्रेष्ठ स्त्री समाज के निर्माण से ही संभव होगा। 

डॉ (चिकित्षा) पेशे से जुड़े जो लोग मुझ पर एहसान का दिखावा कर रहे थे या अभी भी कर रहे हैं हो उनको बताना चाहूँगा की अगर वे अपने को भगवान समझते हैं तो हम उस भगवान के भी ससम्मान जीवन के जीवन रक्षक हैं। एक डॉ(चिकित्सा) जो जीवन भर एक नए पैसे की कमाई नहीं की और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, जन संघ, विश्व हिन्दू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्पित रहे और दिग्गज लोगों के नेतृत्व में सहभागिता निभाई हो के पिता; एक डॉ (चिकित्सा) और एक डॉ (वैश्विक स्तर पर बहु आयामी विज्ञान के ज्ञाता और अपने विषयक के शीर्षस्थ वैज्ञानिक) के बाबा जो कुल के ही शिक्षक नही वरन अपने क्षेत्र के लोगों के लिए भी शिक्षण किया करते थे मतलब पूर्ण रूप से ब्राह्मण थे उनके जीवन की रक्षा हेतु समर्पित हिन्दुस्तान मिल के उस तकनीशियन का पौत्र हूँ जो भूतपूर्व रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज जैसे मजदूर यूनियन के नेताओं के जैसे लोगों का समतुल्य रहा हो और हिन्दुस्तान मिल के उद्योगपति का विश्वासपात्र भी इसके बावजूद रहा हो और जो युवा व्यक्तित्व तत्कालीन अपने गाँव के रामपुर-आजमगढ़-223225 के एक शीर्सस्थ परिवार से था जमीनी जायदाद और पुरुषार्थ समाहित करते हुए और आज पुनः है। मै राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इसलिए नहीं जुड़ा हुआ हूँ वाल्यकाल से की उसकी नीव किशी से डॉ ने डाली और हर डॉ उसका नाजायज श्रेय ले पर इस लिए की उसका ध्वज भगवा (जिसमे इस्वर की भक्ति और शक्ति समाहित हो) ध्वज है जो उनका गुरु होता है जिसकी वे वन्दना करते हैं हर कार्य के अंत में और भगवा सूर्य की अरुणिमा का प्रकाश है जिसमे सभी रंग जीवन के होते है और सूर्य ही एक मात्र स्रोत है जीवन का इस्वर की शक्ति और वैभव का स्वरुप है भगवा। और यही नहीं तिरंगा के केशरिया, सफेद और हरा को मिलाएंगे तो भगवा रंग ही मिलेगा मतलब यह भगवा तिरंगा का जन्म दाता और शक्ति है। >>>>>>>मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।-----------फिर भी डॉ समुदाय को प्रणाम क्योंकि वे मेरे बाबा भी आयुर्वेदिक दवा का प्रचार और प्रसार भी करते थे बहु धंधी व्यक्तित्व होने के कारन लेकिन ब्राह्मण से श्रेष्ठ डॉ नहीं होता है यह मेरी बात सत्य है।

डॉ (चिकित्षा) पेशे से जुड़े जो लोग मुझ पर एहसान का दिखावा कर रहे थे या अभी भी कर रहे हैं हो उनको बताना चाहूँगा की अगर वे अपने को भगवान समझते हैं तो हम उस भगवान के भी ससम्मान जीवन के जीवन रक्षक हैं। एक डॉ(चिकित्सा) जो जीवन भर एक नए पैसे की कमाई नहीं की और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, जन संघ, विश्व हिन्दू परिषद और भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्पित रहे और दिग्गज लोगों के नेतृत्व में सहभागिता निभाई हो के पिता; एक डॉ (चिकित्सा) और एक डॉ (वैश्विक स्तर पर बहु आयामी विज्ञान के ज्ञाता और अपने विषयक के शीर्षस्थ वैज्ञानिक) के बाबा जो कुल के ही शिक्षक नही वरन अपने क्षेत्र के लोगों के लिए भी शिक्षण किया करते थे मतलब पूर्ण रूप से ब्राह्मण थे उनके जीवन की रक्षा हेतु समर्पित हिन्दुस्तान मिल के उस तकनीशियन का पौत्र हूँ जो भूतपूर्व रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज जैसे मजदूर यूनियन के नेताओं के जैसे लोगों का समतुल्य रहा हो और हिन्दुस्तान मिल के उद्योगपति का विश्वासपात्र भी इसके बावजूद रहा हो और जो युवा व्यक्तित्व तत्कालीन अपने गाँव के रामपुर-आजमगढ़-223225 के एक शीर्सस्थ परिवार से था जमीनी जायदाद और पुरुषार्थ समाहित करते हुए और आज पुनः है। मै राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इसलिए नहीं जुड़ा हुआ हूँ वाल्यकाल से की उसकी नीव किशी से डॉ ने डाली और हर डॉ उसका नाजायज श्रेय ले पर इस लिए की उसका ध्वज भगवा (जिसमे इस्वर की भक्ति और शक्ति समाहित हो) ध्वज है जो उनका गुरु होता है जिसकी वे वन्दना करते हैं हर कार्य के अंत में और भगवा सूर्य की अरुणिमा का प्रकाश है जिसमे सभी रंग जीवन के होते है और सूर्य ही एक मात्र स्रोत है जीवन का इस्वर की शक्ति और वैभव का स्वरुप है भगवा। और यही नहीं तिरंगा के केशरिया, सफेद और हरा को मिलाएंगे तो भगवा रंग ही मिलेगा मतलब यह भगवा तिरंगा का जन्म दाता और शक्ति है। >>>>>>>मै राष्ट्रीय सेवक संघ का ही नहीं अंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रणेता हूँ आज की उस परिस्थिति में जब लोग जान गए हों की इस्लाम सामानांतर चलता है श्रीरामाचरण के और ईसाइयत चलाती है श्रीकृष्णाचरण के और सभी सनातन हिन्दू धर्म के महासमुद्र से चले है और इसी महा समुद्र में ही आधार पाते है जीवन का और इसी महा समुद्र में मिल भी जाते हैं।-----------फिर भी डॉ समुदाय को प्रणाम क्योंकि वे मेरे बाबा भी आयुर्वेदिक दवा का प्रचार और प्रसार भी करते थे बहु धंधी व्यक्तित्व होने के कारन लेकिन ब्राह्मण से श्रेष्ठ डॉ नहीं होता है यह मेरी बात सत्य है।

Tuesday, September 2, 2014

Vivek Kumar Pandey

Vivek Kumar Pandey has one of the reference link: http://wikigrain.org/?req=Vivek+Kumar+Pandey
and second one is 
https://profiles.google.com/vkpandey75/about?hl=en 

Dr. Vivek Kumar Pandey


Dr. Vivek Kumar Pandey has one of the reference link: https://archive.today/4HDpi
 and second one is:
https://profiles.google.com/vkpandey75/about?hl=en



King Shri Ram exiled Sita and she sheltered at Vithoor in Ashram of Valmiki where she given birth to Lav-Kush. After some time they taken education from Maharshi Valmiki. Lav-Kush meets with Sri Ram in battle of Ashvamedh Yagya where they forced to army of Ayodhya to send Shri Ram for battle to release the horse and Shri Ram recognized them as son of his own and he took them Ayodhya and then Valmiki took Sita too to Ayodhya but Ram denied to accept Sita as his wife then Sita entered into the Earth(Samahit) in Sita-Samahit Sthal comes under the Prayagaraj/ Allahabad district of Uttar Pradesh.

King Shri Ram exiled Sita and she sheltered at Vithoor in Ashram of Valmiki where she given birth to Lav-Kush. After some time they taken education from Maharshi Valmiki. Lav-Kush meets with Sri Ram in battle of Ashvamedh Yagya where they forced to army of Ayodhya to send Shri Ram for battle to release the horse and  Shri Ram recognized them as son of his own and he took them Ayodhya and then Valmiki took Sita too to Ayodhya but Ram denied to accept Sita as his wife then Sita entered into the Earth(Samahit) in Sita-Samahit Sthal comes under the Prayagaraj/ Allahabad district of Uttar Pradesh.