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Tuesday, October 21, 2014

आनंद का अनुभव विना विवेक के कैसे होगा? Saravati have three children: Vivek(Son), Gyan(Son), Vidya (Daughter)

आनंद का अनुभव विना विवेक के कैसे होगा? Saravati have three children: Vivek(Son), Gyan(Son), Vidya (Daughter)

मेरी दृस्टि में उस सहस्स्राब्दी हेतु युगपरिवर्तन और सृजनात्मक घडी में तीन कृष्ण (अटल बिहारी(कृष्ण का राशि नाम), लालकृष्ण, मुरली मनोहर) में से अटल विहारी स्वयं राम की भूमिका और स्वरुप में, मुरली मनोहर स्वयं कृष्ण की भूमिका और स्वरुप में तो लालकृष्ण स्वयं हनुमान/अम्बेडकर/अम्बवादेकर की भूमिका और स्वरुप में थे एक राजनयिक के रूप में। इस प्रकार जोशी धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से ब्रह्मा और राजनैतिक रूप से महाभारत कालीन परमब्रह्म श्रीकृष्ण की भूमिका में थे उस सहस्राब्दी हेतु हुए परिवर्तन के युग में। और अब श्रीकृष्ण (दामोदर) के पुत्र राजा प्रद्दुम्न किस भूमिका में हैं कुछ और लोग बताएं।

मेरी दृस्टि में उस सहस्स्राब्दी हेतु युगपरिवर्तन और सृजनात्मक घडी में तीन कृष्ण (अटल बिहारी(कृष्ण का राशि नाम), लालकृष्ण, मुरली मनोहर) में से अटल विहारी स्वयं राम की भूमिका और स्वरुप में,  मुरली मनोहर स्वयं कृष्ण की भूमिका और स्वरुप में तो लालकृष्ण स्वयं हनुमान/अम्बेडकर/अम्बवादेकर की भूमिका और स्वरुप में थे एक राजनयिक के रूप में। इस प्रकार जोशी धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से ब्रह्मा और राजनैतिक रूप से महाभारत कालीन परमब्रह्म श्रीकृष्ण की भूमिका में थे उस सहस्राब्दी हेतु हुए परिवर्तन के युग में। और अब श्रीकृष्ण (दामोदर) के पुत्र राजा प्रद्दुम्न किस भूमिका में हैं कुछ और लोग बताएं।      

कौन सा काल्की अवतार जन्म लेगा? वह जो प्रोफेसर श्रीवास्तव गुरुदेव में अपने नाना का स्वरुप, अपने गुरु प्रोफेसर पाण्डेय जी में अपने बड़े भाई का स्वरुप, सहयोगी गुरु प्रोफेसर दास में मामा का (केवल वाह्य) स्वरुप और सहयोगी मित्र डॉ द्विवेदी में अपने मामा के पुत्र का स्वरुप(भाई का स्वरुप) देखा हो और विशेष सहयोगी में मिश्रा जी में मामा और जुडवा भाई में भाई( सावर्ण:कश्यप पौत्र) का स्वरुप इस अपने विज्ञान केंद्र को अपना घर कह दिया हो और ऐसा ही नहीं जहां भी गया सब किशी न किशी परिचित/सम्बन्धी/पडोशी के स्वरुप मिले । जो अपने मामा में विष्णु शक्ति और ताऊ जी में शिव शक्ति तथा जोशी में ब्रह्मा की शक्ति देखी हो उस समय अंतराल के लिए और जिसके लिए दुनिया की सर्वोच्च विश्व शक्ति की इजाजत के बिना ही किशी को संयुक्त रास्त्र संघ का महा सचिव बना भी एक हंसी खेल था वह इस्वर आप सबको देख रहा था और यह पा रहा था की आप सभी अपने कर्म को भोगते हैं पर आप के गलत कार्यों का दुःख जीवन के हर क्षेत्र और व्यवसाय से आने वाले इस दुनिया को चलाने का जिम्मा लेने वाले हर संत और सज्जन उठाते हैं।--------पर प्रश्न यह है की जब 50 % से ज्यादा लोग गलत करेंगे तो क्या ये सज्जन और संत भी इस दुनिया को चला पाने में समर्थ होंगे? और होंगे तो कब तक और किस प्रकार? और सबके दुःख को ये संत और सज्जन उठाते ही क्यों हैं? जब हम केवल अपने ही स्वार्थ के बारे सोचते हैं और अपने स्वार्थ को पूरे करने में जो विष तैयार होता है उसका वमन केवल सज्जन और संत क्यों करें? ----------मेरे भाई श्रीराम/कृष्ण/बुध्ध ने ऐसा क्या कुछ नहीं किया है इस संसार में की जिनके आचरण और कर्म का अनुसरण कर हम विष्णु को काल्की अवतार लेकर सांसारिक दुःख झेलने से मुक्ति न दें सके?*******जग में प्यारे हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम(गौतम ऋषि के भी ईस्टदेव राम ही थे जिनके गोत्र कुल में बुद्ध मतलब सिद्धार्थ गौतम जन्म लिए थे)।

कौन सा काल्की अवतार जन्म लेगा?  वह जो प्रोफेसर श्रीवास्तव गुरुदेव में अपने नाना का स्वरुप, अपने गुरु प्रोफेसर पाण्डेय जी  में अपने बड़े भाई का स्वरुप, सहयोगी गुरु प्रोफेसर दास में मामा का (केवल वाह्य) स्वरुप और सहयोगी मित्र डॉ द्विवेदी में अपने मामा के पुत्र का स्वरुप(भाई का स्वरुप) देखा हो और विशेष सहयोगी में मिश्रा जी में मामा और जुडवा भाई में भाई( सावर्ण:कश्यप पौत्र) का स्वरुप इस अपने विज्ञान केंद्र को अपना घर कह दिया हो और ऐसा ही नहीं जहां भी गया सब किशी न किशी परिचित/सम्बन्धी/पडोशी के स्वरुप मिले । जो अपने मामा में विष्णु शक्ति और ताऊ जी में शिव शक्ति तथा जोशी में ब्रह्मा की शक्ति देखी हो उस समय अंतराल के लिए और जिसके लिए दुनिया की सर्वोच्च विश्व शक्ति की इजाजत के बिना ही किशी को संयुक्त रास्त्र संघ का महा सचिव बना भी एक हंसी खेल था वह इस्वर आप सबको देख रहा था और यह पा रहा था की आप सभी अपने कर्म को भोगते हैं पर आप के गलत कार्यों का दुःख जीवन के हर क्षेत्र और व्यवसाय से आने वाले इस दुनिया को चलाने का जिम्मा लेने वाले हर संत और सज्जन उठाते हैं।--------पर प्रश्न यह है की जब 50 % से ज्यादा लोग गलत करेंगे तो क्या ये सज्जन और संत भी इस दुनिया को चला  पाने में समर्थ होंगे? और होंगे तो कब तक और किस प्रकार? और सबके दुःख को ये संत और सज्जन उठाते ही क्यों हैं? जब हम केवल अपने ही स्वार्थ के बारे सोचते हैं और अपने स्वार्थ को पूरे करने में जो विष तैयार होता है उसका वमन केवल सज्जन और संत क्यों करें? ----------मेरे भाई श्रीराम/कृष्ण/बुध्ध ने ऐसा क्या कुछ नहीं किया है इस संसार में की जिनके आचरण और कर्म का अनुसरण कर हम विष्णु को काल्की अवतार लेकर सांसारिक दुःख झेलने से मुक्ति न दें सके?*******जग में प्यारे हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम(गौतम ऋषि के भी ईस्टदेव राम ही थे जिनके गोत्र कुल में बुद्ध मतलब सिद्धार्थ गौतम जन्म लिए थे)। 

श्रीरामनवमी, श्रीकृष्णजन्मास्टमी और विजय दशमी भारतवर्ष के श्रेष्ठतम पर्व हैं पर विजय दशमी पूर्णाहुति दीपावली के आने पर श्रीराम के राज्य-अभिषेक(राज्याभिषेक) से होती है। अतः मै भी पूर्णाहुति कर दूँ आप लोगों के सामने प्रयागराज/अल्लाहबाद की सांस्कृतिक शक्ति का तो उचित ही होगा:---------श्रीराम/रघुवंश/इक्शाकुवंश/सूर्यवंश/कश्यप गोत्रीय के समानांतर चलने वाले इस्लाम से और श्रीकृष्ण/वृष्णि वंश/यदुवंश/चन्द्रवंश/कश्यप गोत्रीय के सामानांतर वाले ईसाइयत से यदि सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण; और गौतम गोत्रीय क्षत्रिय सिद्धार्थ द्वारा चलाये गए पंथ बौद्ध और उसके अनुयायी तथाकथित दलित से यदि सनातन गौतम(न्याय दर्शन के प्रणेता पर मत्स्य न्याय के समर्थक नहीं) गोत्रिय वयासी मिश्रा ब्राह्मण अगर डरने लगें तो उस समाज और संविधान को कार्यान्वित करने की शक्ति कौन रख सकेगा और अगर कार्यान्वित होता हुआ माना जा रहा है तो वह भगवान भरोसे ही कहा जाएगा और ऐसे में इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत आ गयी है। अगर अगर ऐसा चल भी रहा है तो वह सनातन संस्कृति के रक्षकों की सहन-शीलता पर चल रहा है जिनकी(सप्तर्षियों:सातों ब्रह्मर्षियों) संतति यह वर्त्तमान विश्व/देश/समाज है।----------एक सीधा सा उत्तर है अगर संप्रभुता का अधिकार मांगना है या देना है तो अधिकार के साथ-साथ संस्कृति और संस्कार की रक्षा का भी अधिकार भी लो और दो अन्यथा आप के अस्तित्व पर स्वयं एक ख़तरा मड़रा रहा है।---------मेरे जैंसा सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण(मै स्वयं गौतम गोत्रीय ब्राह्मण का वह नाती=ग्रैंडसन भी हूँ जिस जिनका कोई विकल्प नहीं ब्राह्मणत्व में वर्तमान दुनिया में प्रयागराज/कैलाश-पर्वत/गोरखपुर/जौनपुर:जमदग्निपुर ((जमदग्नि/भृगु(दधीचि) का क्षेत्र जो दुनिया में मेधा और संस्कृति सर्वोच्च स्थान रखता है))) सत्य के मार्ग से झुकने वाला नहीं और अगर झुका हुआ पाया गया तो वव गुरुजन के उस आश्वासन और आदेश पर रहा है की यह अमुक प्रसंग श्रिस्टी और समाज के हित में है जो की एक समर्पण और त्याग था/है जिसमे बलिदान और तप (तपस्या) अपने आप में समाहित है।-------जाती/धर्म वाद मत करो पर जाती और धर्म मिटाने पर उतारू क्यों हो और मेरा प्रश्न है की क्या दुनिया के पास ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य और मिलीजुली संस्कृति के लोगों का विकल्प मिल गया है जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश के गुणों पर आधारित है ? और अगर मिल गया है तो सनातन संस्कृति से अगल पंथ समुदाय बनाने वालों की सस्कृति इस भारतीय संस्कृति से ऊंची क्यों नहीं हुई आज तक? -----------मैंने अपने जीवन में सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण की सीमा में रहकर हर जाती, धर्म और संस्कृति के अनुरूप व्यवहार किया है सम्यक जीवन के कार्यों और जिम्मेदारियों को संपादित करने में पर विश्व में एक बहुत ही अपमानित और द्वेषसित किये जाने वाली इस जाती/धर्म को कभी नहीं छोड़ा (ब्राह्मण जाती/धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमे पूर्ण ब्राह्मण बन कर आप विशेस कर उत्तर भारत या भारत में आसानी से जी सकते है अन्यथा बाहर आहार-विहार पर आप को बहुत ही कठिन नियम और ध्यान रखने पड़ते है, यही एक कारन है की क्षत्रिय और वैश्य समाज भारत से बाहर सदियों से जाते रहे पर ब्राह्मण केवल कुछ ही जाते थे और अब ज्यादा जाने लगे है जिससे भारतीय संस्कृति के अनुपालन में एक रिक्तता हो रही भारत में उनका उत्तराधिकारी सांस्कृतिक रूप से यथा संभव न मिलाने पर इस संप्रभुता हेतु अधिकार की अंधी दौड़ में पर इसका विस्तार हो रहा बाहर के देश में संतोष विषय है उनके लिए पर भारत के लिए नही)।एक ऐसे केंद्र पर हूँ जहां हर जाती/धर्म के कर्मचारी,शोधकर्ता और शिक्षक एक ही पात्र में रखा दाना चबाते और चटनी भी एक स्थान पर रखी रहती है जिसका सेवन करते हैं कई बार जिससे यह भी जूठा ही हो जाता है बावजूद इसके की यह ब्राह्मण बहुतायत का केंद्र है और श्रेष्ठ ब्राह्मण यहां रहते है यह मेरा दावा है अगर मुझे आप एक ब्राह्मण जाती /धर्म का मानते है।******* इस सन्देश कें साथ आप सभी को दीपावली की शुभ कामना।

श्रीरामनवमी, श्रीकृष्णजन्मास्टमी और विजय दशमी भारतवर्ष के श्रेष्ठतम पर्व हैं पर विजय दशमी पूर्णाहुति दीपावली के आने पर श्रीराम के राज्य-अभिषेक(राज्याभिषेक) से होती है। अतः मै भी पूर्णाहुति कर दूँ आप लोगों के सामने प्रयागराज/अल्लाहबाद की सांस्कृतिक शक्ति का तो उचित ही होगा:---------श्रीराम/रघुवंश/इक्शाकुवंश/सूर्यवंश/कश्यप गोत्रीय के समानांतर चलने वाले इस्लाम से और श्रीकृष्ण/वृष्णि वंश/यदुवंश/चन्द्रवंश/कश्यप गोत्रीय के सामानांतर वाले ईसाइयत से यदि सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण; और गौतम गोत्रीय क्षत्रिय सिद्धार्थ द्वारा चलाये गए पंथ बौद्ध और उसके अनुयायी तथाकथित दलित से यदि सनातन गौतम(न्याय दर्शन के प्रणेता पर मत्स्य  न्याय के समर्थक नहीं) गोत्रिय वयासी मिश्रा ब्राह्मण अगर डरने लगें तो उस समाज और संविधान को कार्यान्वित करने की शक्ति कौन रख सकेगा और अगर कार्यान्वित होता हुआ माना जा रहा है तो वह भगवान भरोसे ही कहा जाएगा और ऐसे में इस पर पुनर्विचार करने की जरूरत आ गयी है। अगर अगर ऐसा चल भी रहा है तो वह सनातन संस्कृति के रक्षकों की सहन-शीलता पर चल रहा है जिनकी(सप्तर्षियों:सातों ब्रह्मर्षियों) संतति यह वर्त्तमान विश्व/देश/समाज है।----------एक सीधा सा उत्तर है अगर संप्रभुता का अधिकार मांगना है या देना है तो अधिकार के साथ-साथ संस्कृति और संस्कार की रक्षा का भी अधिकार भी लो और दो अन्यथा आप के अस्तित्व पर स्वयं एक ख़तरा मड़रा रहा है।---------मेरे जैंसा सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण(मै स्वयं गौतम गोत्रीय ब्राह्मण का वह नाती=ग्रैंडसन भी हूँ जिस जिनका कोई विकल्प नहीं ब्राह्मणत्व में वर्तमान दुनिया में प्रयागराज/कैलाश-पर्वत/गोरखपुर/जौनपुर:जमदग्निपुर ((जमदग्नि/भृगु(दधीचि) का क्षेत्र जो दुनिया में मेधा और संस्कृति सर्वोच्च स्थान रखता है))) सत्य के मार्ग से झुकने वाला नहीं और अगर झुका हुआ पाया गया तो वव गुरुजन के उस आश्वासन और आदेश पर रहा है की यह अमुक प्रसंग श्रिस्टी और समाज के हित में है जो की एक समर्पण और त्याग था/है जिसमे बलिदान और तप (तपस्या) अपने आप में समाहित है।-------जाती/धर्म वाद मत करो पर जाती और धर्म मिटाने पर उतारू क्यों हो और मेरा प्रश्न है की क्या दुनिया के पास ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य और मिलीजुली संस्कृति के लोगों का विकल्प मिल गया है जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश के गुणों पर आधारित है ? और अगर मिल गया है तो सनातन संस्कृति से अगल पंथ समुदाय बनाने वालों की सस्कृति इस भारतीय संस्कृति से ऊंची क्यों नहीं हुई आज तक? -----------मैंने अपने जीवन में सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण की सीमा में रहकर हर जाती, धर्म और संस्कृति के अनुरूप व्यवहार किया है सम्यक जीवन के कार्यों और जिम्मेदारियों को संपादित करने में पर विश्व में एक बहुत ही अपमानित और द्वेषसित किये जाने वाली इस जाती/धर्म को कभी नहीं छोड़ा (ब्राह्मण जाती/धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमे पूर्ण ब्राह्मण बन कर आप विशेस कर उत्तर भारत या भारत में आसानी से जी सकते है अन्यथा बाहर आहार-विहार पर आप को बहुत ही कठिन नियम और ध्यान रखने पड़ते है, यही एक कारन है की क्षत्रिय और वैश्य समाज भारत से बाहर सदियों से जाते रहे पर ब्राह्मण केवल कुछ ही जाते थे और अब ज्यादा जाने लगे है जिससे भारतीय संस्कृति के अनुपालन में एक रिक्तता हो रही भारत में उनका उत्तराधिकारी सांस्कृतिक रूप से यथा संभव न मिलाने पर इस संप्रभुता हेतु अधिकार की अंधी दौड़ में पर इसका विस्तार हो रहा बाहर के देश में संतोष विषय है उनके लिए पर भारत के लिए नही)।एक ऐसे केंद्र पर हूँ जहां हर जाती/धर्म के कर्मचारी,शोधकर्ता और शिक्षक एक ही पात्र में रखा दाना चबाते और चटनी भी एक स्थान पर रखी रहती है जिसका सेवन करते हैं कई बार जिससे यह भी जूठा ही हो जाता है बावजूद इसके की यह ब्राह्मण बहुतायत का केंद्र है और श्रेष्ठ ब्राह्मण यहां रहते है यह मेरा दावा है अगर मुझे आप एक ब्राह्मण जाती /धर्म का मानते है।******* इस सन्देश कें साथ आप सभी को दीपावली की शुभ कामना।

Monday, October 20, 2014

Allahabad University "Proud Past Alumni" list of 42 members:Allahabad University Alumni Association(Registration No. 407/2000 under Society Act 1860):Famous alumni include

Allahabad University "Proud Past Alumni" list of 42 members https://archive.today/aKXW
Allahabad University "Proud Past Alumni" list of 42 members
https://archive.today/7ocui 

Allahabad University Alumni Association(Registration No. 407/2000 under Society Act 1860):Famous alumni include:
Our Proud Past
Prof. Prem Chand Pandey (Dr, P.C. Pandey, SAC/ISRO,NCAOR/MoES, CORAL/IIT Kgp): Founder Director of National centre for Antarctic and Ocean Research (NCAOR), Goa, 1st student of University of Allahabad who got Bhatnagar award and Uttar Pradesh Vigyan Gaurav award along with many other award of science, he got Gold medal award of NASA, USA for his short span of time good work there as ISRO, Govt. of India
employ on training. His help for new scientific centres in UoA indirectly is very important and was at exact turning period of university's future vision in modern era. KBCAOS/MNCOSS, IIDS is one of the on surface example known by all related with UoA.
Ram Chandra Sinha, Former IAS Officer, Former Secretary to the Chief Minister of Bihar, Chairman of the Patna Improvement Trust, Divisional Commissionor (Bhaglpur), Commissioner (Agriculture, Education), Sub Divisional Officer, District Magistrate, founder of the Sudha Co-Operative, now Senior Advocate.
Harivansh Rai Bachchan, Poet
Krishna Prakash Bahadur, Author
H.N. Bahuguna, former Deputy Prime Minister of India
Prof. Harish Chandra, Mathematician
Acharya Narendra Dev
Mohammad Hidayatullah, Former Chief Justice, Supreme Court of India
Ranganath Mishra, former Chief Justice of India
Gulzari Lal Nanda, former Prime Minister of India
Motilal Nehru
Govind Ballabh Pant
Prof. Govind Jee. Prof. University of Illinois, Former head-
International society for Photobiology.
Gopal Swarup Pathak, former Vice President of India
Dr V.K.Rai, Plant physiology
Dr. Shankar Dayal Sharma, Former President of India
Chandra Shekhar, Former Prime Minister of India
Satyendra Narayan Sinha, Former Chief Minister of Bihar
Prof. Ram Chandra Shukla, Painter.
Surya Bahadur Thapa
Prof. Vijai K Tripathi
Kamal Narain Singh, former Chief Justice of India
Nikhil Kumar, former IPS, Member of Parliament India
Prof. Daulat Singh Kothari, Physicist
Prof. Kundan Singh Singwi, Physicist
Prof. Govind Swarup, Physicist
Udit Raj, Social Activist
Pankaj Mishra, Author
Krishna Kumar Sharma, Quit India Movement Leader and Activist,
Prominent Poet and Literary Figure
Vishwanath Pratap Singh,10th Prime Minister of India
Murli Manohar Joshi,B.J.P leader and former Minister for Human
resource&development
Dharmendra Singh Yadav , Member of Parliament India
Radhey Shyam Sharma, IPS, Former Director Vigilance UP
Maharishi Mahesh Yogi
Dhananjaya Kumar, Yogacharya, Poet
Mahadevi Varma (poet and writer)
Mukhtar Zaman, freedom fighter, leading journalist
Dr Umesh C Yadav, Research scientist, Univ of Texas, USA
Indu Kant Shukla, Litterateur,Poet,Writer.
Prafulla Kumar Rai, MP for Gorakhpur (Uttar Pradesh)
D.P. Chandel, equity researcher (New york, USA)
Dr. Vivek Kumar Pandey PDF at Centre for Atmospheric & Oceanic Sciences, IISc Bangalore, 1st doctorate from K.Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies(KBCAOS,IIDS), University of Allahabad(UoA), Allahabad and (1st batch JRF of National Centre for Antarctic and Ocean Research (NCAOR), Goa,Master of Science Department of Physics(Nuclear)-2000, BHU, Varanasi, B.Sc. from Purvanchal University, Jaunpur (U.P.)

प्रद्दुम्न श्रीकृष्ण के एक मात्र भौतिक पुत्र और चारुमति उनकी एक मात्र भौतिक पुत्री थीं जिनकी धात्री(माँ) रुक्मणी ही थीं। और अनिरुद्ध प्रद्दुम्न के एक मात्र भौतिक पुत्र हैं जो इस प्रकार श्रीकृष्ण के एक मात्र पौत्र थे। जिसके बाद अनिरुद्ध और उनकी मित्र मंडली की उद्दंडता से कुपित हो ऋषि समुदाय के नायक कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) द्वारा उनके स्वयं के कुल यदुवंश का श्रीकृष्ण समेत नाश हुआ पर गोकुल-मथुरा-वृन्दावन के कृष्ण भक्तों की कृपा से यदुवंश आज भी तथावत जीवित है।

प्रद्दुम्न श्रीकृष्ण के एक मात्र भौतिक पुत्र और चारुमति उनकी एक मात्र भौतिक पुत्री थीं जिनकी धात्री(माँ) रुक्मणी ही थीं। और अनिरुद्ध प्रद्दुम्न के एक मात्र भौतिक पुत्र हैं जो इस प्रकार श्रीकृष्ण के एक मात्र पौत्र थे। जिसके बाद अनिरुद्ध और उनकी मित्र मंडली की उद्दंडता से कुपित हो ऋषि समुदाय के नायक कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) द्वारा उनके स्वयं के कुल यदुवंश का श्रीकृष्ण समेत नाश हुआ पर गोकुल-मथुरा-वृन्दावन के कृष्ण भक्तों की कृपा से यदुवंश आज भी तथावत जीवित है।

कोसलपुरी/अवधपुरी: भगवान श्रीराम के समय में इसका विस्तार हिन्दुकुश /लव-कुश क्षेत्र तक था और भरत के पुत्रों और स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र लव-कुश के पग चिन्ह यहां के शासक के रूप में रहे है मतलब अखंड भारत न की केवल वर्तमान भारत इस चक्रवर्ती साम्राज्य में शामिल था जिसकी राजधानी अयोध्या ही थी। कोसल-अवध (कोसलपुरी और अवधपुरी) दोनों प्रसंग है और इसे विभेद का विषय कहीं नहीं बनाया गया है:१) कोसल:कोसलेश:कोसलपुरी -----प्रविश नगर कीजै सब काजा, ह्रदय राखी कोसलपुर राजा । कोसलेश दशरथ के जाये, हम पित बचन मानि वन आये।२) अवध:अवधेश:अवधपुरी-------अवध पुरी मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिस सरयू वह पावनि। -----अवधेश के बालक चारि सदा तुलसी मन मंदिर में विहरें।

कोसलपुरी/अवधपुरी: भगवान श्रीराम के समय में इसका विस्तार हिन्दुकुश /लव-कुश क्षेत्र तक था और भरत के पुत्रों और स्वयं मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र लव-कुश के पग चिन्ह यहां के शासक के रूप में रहे है मतलब अखंड भारत न की केवल वर्तमान भारत इस चक्रवर्ती साम्राज्य में शामिल था जिसकी राजधानी अयोध्या ही थी। कोसल-अवध (कोसलपुरी और अवधपुरी) दोनों प्रसंग है और इसे विभेद का विषय कहीं नहीं बनाया गया है:१) कोसल:कोसलेश:कोसलपुरी -----प्रविश नगर कीजै सब काजा, ह्रदय राखी कोसलपुर राजा । कोसलेश दशरथ के जाये, हम पित बचन मानि वन आये।२) अवध:अवधेश:अवधपुरी-------अवध पुरी मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिस सरयू वह पावनि। -----अवधेश के बालक चारि सदा तुलसी मन मंदिर में विहरें।