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Saturday, November 1, 2014

ऐसा व्यक्ति किससे डरता था? डरता था की कहीं इस सृस्टि का अस्तित्व ही न ख़त्म हो जाय आप लोगों की ही उद्दंडता और स्वेक्षाचारिता की वजह से अन्यथा मै जनता था की मेरा कोई विकल्प इस दुनिया में आज तक जन्म हीं नहीं लिया। यह दम्भ नहीं है वर्णन है क्योंकि उस हरकत को पढ़ सकें वाला और समझ सकने वाला मै ही था जिसके साथ हुई। इसलिए अब तो सुधर जाओ और मान लो की "सत्यमेव जयते" ? सामाजिक नाम विवेक(सुबोध:सिद्धार्थ: राहुल:त्रिलोचन:त्रिनेत्र: त्रयम्बक) कुमार पाण्डेय, रामपुर(आज़मगढ़)-223225 के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय श्रद्धेय श्री प्रदीप कुमार पाण्डेय और श्रीमती पुष्पा पाण्डेय की संतति। 11 नवम्बर 1975, सुबह 9.15, नक्षत्र धनिष्ठ, दीपाली का आठवाँ दिन मतलब शुक्ल पक्ष अस्टमी मतलब गोपाअस्टमी मतलब गोबर्धन अस्टमी, राशि नाम: [गिरिधारी:---1) गोबर्धनधारी) कृष्ण, 2) (मेरु)धारी कुर्मावतारी विष्णु, 3) धौलागिरिधारी हनुमान), जिनका सुल्तानपुर (अवध:कोसल) से सनातन गौतम गोत्रीय श्रीमती वन्दना पाण्डेय(दुबे) से १) प्रथम पुत्र विष्णुकांत राशिनाम वेंकटेश समय 30 सितम्बर, 2010(सामाजिक नियमों-विधानों में भी भगवान श्रीराम के अयोध्या में अस्तित्व की स्वीकारोक्ति),शुक्ल पक्ष, सुबह 5 बजकर 11 मिनट। २) द्वितीय पुत्र कृष्णकांत, राशिनाम वाशुदेव (कृष्ण) समय 28 अगस्त, 2013, शाम 8.12, कृष्ण पक्ष और 100% वही घडी और नक्षत्र जब भगवान श्रीकृष्ण जन्म लिए थे।--------अब आप समझ सकते हैं उस स्थान को जहां मै जन्म लिया था: सनातन वशिष्ठ गोत्रीय रमाकांत(+लालता प्रशाद) मिश्रा का घर जिनका ननिहाल और मेरा ननिहाल बिशुनपुर(बिष्णुपुर)-223103(जौनपुर) ही है सनातन गौतम गोत्रीय रामानंद-महेश-देवव्रत के देवव्रत(शंकर-अमरनाथ-परमात्मा) के कुल में ही पर वे लोग मेरे पिताजी के मामा है और वह घर है भरारी(अपभ्रंस है भर्रारी का जिसका अर्थ है तेज:द्वितिगति से चलने वाला), पट्टी-चकेशर-223103(जौनपुर) (सरायमहीउद्दीनपुर- 223103 मुख्य पोस्ट के तहत दोनों आते हैं)। अतः बिशुनपुर और भर्रारी दोनों में बहुत गहरा सम्बन्ध है वैसे भी गौतम ऋषि और वशिष्ठ ऋषि दोनों कैलाश पर्वत पर महादेव भोले शिव शंकर की छाया में ही रहते थे और दोनों महादेव शिव शंकर के अनन्य भक्त हैं। अब आप समझ सकते है की मुझे किससे डरना है? -----ऐसा व्यक्ति किससे डरता था? डरता था की कहीं इस सृस्टि का अस्तित्व ही न ख़त्म हो जाय आप लोगों की ही उद्दंडता और स्वेक्षाचारिता की वजह से अन्यथा मै जनता था की मेरा कोई विकल्प इस दुनिया में आज तक जन्म हीं नहीं लिया। यह दम्भ नहीं है वर्णन है क्योंकि उस हरकत को पढ़ सकें वाला और समझ सकने वाला मै ही था जिसके साथ हुई। इसलिए अब तो सुधर जाओ और मान लो की "सत्यमेव जयते"? अखिलेश जाकर पूंछे भरारी((अपभ्रंस है भर्रारी का जिसका अर्थ है तेज:द्वितिगति से चलने वाला), पट्टी-चकेशर-223103(जौनपुर) (सरायमहीउद्दीनपुर- 223103) )वालों से की उनका मेरा क्या सम्बन्ध है? श्रीकृष्ण के सब चरित्र ग्रह दशा होने के बाद भी मैंने श्रीराम का ही आचरण किया और अंत में महादेव, कुर्मावतारी विष्णु, गणेश और हनुमान समेत लगभग सभी विभूतियों के अनुरूप आचरण किया एक श्रेष्ठ ब्राह्मण की सीमा में ही होते हुए इस संसार के सृजन और संरक्षण हेतु। अब आप लोगों को यह समर्पित है|

ऐसा व्यक्ति किससे डरता था? डरता था की कहीं इस सृस्टि का अस्तित्व ही न ख़त्म हो जाय आप लोगों की ही उद्दंडता और स्वेक्षाचारिता की वजह से अन्यथा मै जनता था की मेरा कोई विकल्प इस दुनिया में आज तक जन्म हीं नहीं लिया। यह दम्भ नहीं है वर्णन है क्योंकि उस हरकत को पढ़ सकें वाला और समझ सकने वाला मै ही था जिसके साथ हुई। इसलिए अब तो सुधर जाओ और मान लो की "सत्यमेव जयते" ? सामाजिक नाम विवेक(सुबोध:सिद्धार्थ: राहुल:त्रिलोचन:त्रिनेत्र: त्रयम्बक) कुमार पाण्डेय, रामपुर(आज़मगढ़)-223225 के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय श्रद्धेय श्री प्रदीप कुमार पाण्डेय और श्रीमती पुष्पा पाण्डेय की संतति। 11 नवम्बर 1975, सुबह 9.15, नक्षत्र धनिष्ठ, दीपाली का आठवाँ दिन मतलब शुक्ल पक्ष अस्टमी मतलब गोपाअस्टमी मतलब गोबर्धन अस्टमी, राशि नाम: [गिरिधारी:---1) गोबर्धनधारी) कृष्ण, 2) (मेरु)धारी कुर्मावतारी विष्णु, 3) धौलागिरिधारी हनुमान), जिनका सुल्तानपुर (अवध:कोसल) से सनातन गौतम गोत्रीय श्रीमती वन्दना पाण्डेय(दुबे) से १) प्रथम पुत्र विष्णुकांत राशिनाम वेंकटेश समय 30 सितम्बर, 2010(सामाजिक नियमों-विधानों में भी भगवान श्रीराम के अयोध्या में अस्तित्व की स्वीकारोक्ति),शुक्ल पक्ष, सुबह 5 बजकर 11 मिनट। २) द्वितीय पुत्र कृष्णकांत, राशिनाम वाशुदेव (कृष्ण) समय 28 अगस्त, 2013, शाम 8.12, कृष्ण पक्ष और 100% वही घडी और नक्षत्र जब भगवान श्रीकृष्ण जन्म लिए थे।--------अब आप समझ सकते हैं उस स्थान को जहां मै जन्म लिया था: सनातन वशिष्ठ गोत्रीय रमाकांत(+लालता प्रशाद) मिश्रा का घर जिनका ननिहाल और मेरा ननिहाल बिशुनपुर(बिष्णुपुर)-223103(जौनपुर) ही है सनातन गौतम गोत्रीय रामानंद-महेश-देवव्रत के देवव्रत(शंकर-अमरनाथ-परमात्मा) के कुल में ही पर वे लोग मेरे पिताजी के मामा है और वह घर है भरारी(अपभ्रंस है भर्रारी का जिसका अर्थ है तेज:द्वितिगति से चलने वाला), पट्टी-चकेशर-223103(जौनपुर) (सरायमहीउद्दीनपुर- 223103 मुख्य पोस्ट के तहत दोनों आते हैं)। अतः बिशुनपुर और भर्रारी दोनों में बहुत गहरा सम्बन्ध है वैसे भी गौतम ऋषि और वशिष्ठ ऋषि दोनों कैलाश पर्वत पर महादेव भोले शिव शंकर की छाया में ही रहते थे और दोनों महादेव शिव शंकर के अनन्य भक्त हैं। अब आप समझ सकते है की मुझे किससे डरना है? -----ऐसा व्यक्ति किससे डरता था? डरता था की कहीं इस सृस्टि का अस्तित्व ही न ख़त्म हो जाय आप लोगों की ही उद्दंडता और स्वेक्षाचारिता की वजह से अन्यथा मै जनता था की मेरा कोई विकल्प इस दुनिया में आज तक जन्म हीं नहीं लिया। यह दम्भ नहीं है वर्णन है क्योंकि उस हरकत को पढ़ सकें वाला और समझ सकने वाला मै ही था जिसके साथ हुई। इसलिए अब तो सुधर जाओ और मान लो की "सत्यमेव जयते"?

अखिलेश जाकर पूंछे भरारी((अपभ्रंस है भर्रारी का जिसका अर्थ है तेज:द्वितिगति से चलने वाला), पट्टी-चकेशर-223103(जौनपुर) (सरायमहीउद्दीनपुर- 223103) )वालों से की उनका मेरा क्या सम्बन्ध है?
श्रीकृष्ण के सब चरित्र ग्रह दशा होने के बाद भी मैंने श्रीराम का ही आचरण किया और अंत में महादेव, कुर्मावतारी विष्णु, गणेश और हनुमान समेत लगभग सभी विभूतियों के अनुरूप आचरण किया एक श्रेष्ठ ब्राह्मण की सीमा में ही होते हुए इस संसार के सृजन और संरक्षण हेतु। अब आप लोगों को यह समर्पित है|

Friday, October 31, 2014

देवकाली/आदिशक्ति दुर्गा यदि स्वयं श्रीराम की कुलदेवी हैं और श्रीराम और उनके कुल की रक्षा करती हैं तो उस देवकाली/आदिशक्ति दुर्गा के लिए उसी श्रीराम के अनन्य उपासकों और भक्तों का बलिदान हो गया तो यह बहुत बड़े गर्व की बात है।

देवकाली/आदिशक्ति दुर्गा यदि स्वयं श्रीराम की कुलदेवी हैं और श्रीराम और उनके कुल की रक्षा करती हैं तो उस देवकाली/आदिशक्ति दुर्गा के लिए उसी श्रीराम के अनन्य उपासकों और भक्तों का बलिदान हो गया तो यह बहुत बड़े गर्व की बात है।
http://www.got-blogger.com/vandemataramvivekananddrvkprssbhupuau/

Thursday, October 30, 2014

नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) अमर रहें और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) जिंदाबाद। --हुआ यही की पूरी दुनिया हिन्दुमय हो गयी बिना किशी का धर्म परिवर्तन कराये स्वयं अपने धर्म की सीमा में ही रहकर और मै भी साबित रहा(पत्नी श्रीमती वन्दना पाण्डेय के दो पुत्रों विष्णुकांत और कृष्ण कान्त साथ) अपने स्वयं के जन्मदाता पिता की श्रद्धेय प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी: लक्ष्मीनारायण:सत्यनारायण) कुमार पाण्डेय की शक्ति के पुंज के रूप। --------------बलिदान रामपुर-223225(आज़मगढ़:आर्यमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण परमपिता श्रद्धेय प्रोफेसर प्रेम चंद पाण्डेय (शिव) और बिशुनपुर-223103(जौनपुर:जमदग्निपुर) के मेरे मामा परमगुरु परमपिता परमेश्वर सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा(विष्णु), प्रिंसिपल नेशनल इण्टर कालेज पट्टिनरेन्द्रपुर जौनपुर ने अपने भतीजे और और भांजे का बलिदान किया था और तीसरा मेरा बलिदान करने में स्वयं प्रयागराज विश्व विद्यालय के परमपिता ब्रह्मा लोग थे जिसमे मेरे सगोत्रीय(सनातन कश्यप गोत्रीय पाण्डेय) बड़े भाई और गुरु तथा आङ्गिरास/भारद्वाज सिरोमनि और परमपिता ब्रह्मा तथा महाभारतकालीन श्रीकृष्ण अवतार जोशी जी और श्रीवास्तव जी जिन्होंने मेरे मामा और मेरे ताउजी को मेरा बलिदान करने को प्रेरित किया अप्रत्यक्ष रूप से स्थिति की गंभीरता को न जानते हुए पर मै तो सब जान गया था अपने नामित विवेक की शक्ति से और मेरे बार-२ ऐसा कहने की बावजूद जब लोग इन दोनों महान व्यक्तित्व से मेरा बलिदान दिलवा ही दिए तो आप समझ सकते की मै स्वयं त्याग किया क्योंकि मै तो सब जानता क्या होने वाला है और यह त्याग बलिदान से भी ऊपर होता है क्योंकि बलिदान करने वाले को तो लोग जान जाते हैं पर उस समय प्रयागराज में मुझे कोई जनता भी नहीं था की मेरा स्मरण भी कर सके ?-----------हुआ यही की पूरी दुनिया हिन्दुमय हो गयी बिना किशी का धर्म परिवर्तन कराये स्वयं अपने धर्म की सीमा में ही रहकर और मै भी साबित रहा(पत्नी श्रीमती वन्दना पाण्डेय के दो पुत्रों विष्णुकांत और कृष्ण कान्त साथ) अपने स्वयं के जन्मदाता पिता की श्रद्धेय प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी:लक्ष्मीनारायण:सत्यनारायण) कुमार पाण्डेय की शक्ति के पुंज के रूप। मेरा यह कथन इस बात से प्रमाणित होता है की "जिसका मुझे अधिकार नहीं था, उसका भी बलिदान दिया" यह गीत मुझे सैकड़ों बार 2001 से लेकर 2005 तक इस प्रयागराज विश्व विद्यालय स्थित नेहरू विज्ञान केंद्र के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ययन केंद्र पर सुनाया गया था दो और गीत के साथ जिसको यहाँ देना प्रासंगिक नहीं है। आदमी अपना बलिदान कर सकता है पुत्र बलिदान कर सकता है पर अपने भतीजे और और भांजे का बलिदान कैसे कर सकता है और अगर उन्होंने ने किया और मै स्वीकार किया तो मै उन दोनों का भी पुत्र हुआ की नहीं। ---------मेरे पास विकल्प था इसका पर उससे इतना बड़ा परिवर्तन न होता केवल मेरी कुछ मुस्किल ही आसान होती और मई कुछ ज्यादा चर्चित होता इससे ज्यादा कुछ नहीं और इसी लिए मै इस सब के रचनाकार मेरे ताऊ जी और मामा जे के गुरु श्रेष्ठ जोशी जी को सादर नमन करता हूँ जो मेरे ननिहाल और गाँव दोनों जगह के गुरुश्रेष्ठ आज भी हैं। *******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण। पुनरावृत्ति: ----------------- संदेश:--------- वह महत्त्व और विश्वास जो मेरे दोनों गाँव बिशुनपुर-223103 (जौनपुर :जमदग्निपुर ) और रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़)को नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) में था वही महत्त्व और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) पर था जो सही साबित हुआ। विचारकों में विवेकानंद, टैगोर और नेहरू-गांधी के साथ-साथ सुभाष का समान महत्त्व था। पर इनके आदर्श केवल राम-कृष्ण-हनुमान:अम्बवादेकर:अम्बेडकर ही थे और आज भी हैं और जिनकी आस्था त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) और आदि देवी महादुर्गा(महा लक्ष्मी+महा सरस्वती+महा गौरी:पारवती) में ही थी और आज भी है।--------मै इस सामाजिक विषय के साथ आशान्वित हूँ की भारतीय जनमानस ऐसे ही नेतृत्व को जन्म दे जिनका की त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) भी प्रशंसा करें तो विश्व समाज उनका अपने आप प्रसंसा करेगा । ----------मै रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण देवव्रत-रामप्रसाद-बचनराम-प्रदीप का वंसज तो अपने ननिहाल बिशुनपुर-223103 के सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार के रामानंद((+देवव्रत(वंसज शंकर+अमरनाथ-+परमात्मा)+महेश(जिनके वंसज केदारनाथ))-श्रीनिवास-रामानुज-उत्तमा-रामप्रशाद-रमानाथ(+पारसनाथ)-श्रीकांत(+श्रीधर+श्रीप्रकाश) के उस द्वार पर जीवन के अधिकांश अंश जीने का अवसर पाकर धन्य हुआ जिस दरवाजे से गुजरने पर सिंह की भी दहाड़ मधुर हो जाती थी। उस समय यह थी मेरे नाना श्रद्धेय श्री रमानाथ मिश्र के सभ्यता और संस्कृति का असर जिनके सामने ब्रह्मा को ज्ञान, शिव को शक्ति और विष्णु को धन का गर्व/घमंड/मद न रह जाय और एक विनम्र और सुसंस्कृत व्यवहार से सज्जनता से पेश आएं।



नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) अमर रहें और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) जिंदाबाद। --हुआ यही की पूरी दुनिया हिन्दुमय हो गयी बिना किशी का धर्म परिवर्तन कराये स्वयं अपने धर्म की सीमा में ही रहकर और मै भी साबित रहा(पत्नी श्रीमती वन्दना पाण्डेय के दो पुत्रों विष्णुकांत और कृष्ण कान्त साथ) अपने स्वयं के जन्मदाता पिता की श्रद्धेय प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी: लक्ष्मीनारायण:सत्यनारायण) कुमार पाण्डेय की शक्ति के पुंज के रूप। --------------बलिदान रामपुर-223225(आज़मगढ़:आर्यमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण परमपिता श्रद्धेय प्रोफेसर प्रेम चंद पाण्डेय (शिव) और बिशुनपुर-223103(जौनपुर:जमदग्निपुर) के मेरे मामा परमगुरु परमपिता परमेश्वर सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा(विष्णु), प्रिंसिपल नेशनल इण्टर कालेज पट्टिनरेन्द्रपुर जौनपुर ने अपने भतीजे और और भांजे का बलिदान किया था और तीसरा मेरा बलिदान करने में स्वयं प्रयागराज विश्व विद्यालय के परमपिता ब्रह्मा लोग थे जिसमे मेरे सगोत्रीय(सनातन कश्यप गोत्रीय पाण्डेय) बड़े भाई और गुरु तथा आङ्गिरास/भारद्वाज सिरोमनि और परमपिता ब्रह्मा तथा महाभारतकालीन श्रीकृष्ण अवतार जोशी जी और श्रीवास्तव जी जिन्होंने मेरे मामा और मेरे ताउजी को मेरा बलिदान करने को प्रेरित किया अप्रत्यक्ष रूप से स्थिति की गंभीरता को न जानते हुए पर मै तो सब जान गया था अपने नामित विवेक की शक्ति से और मेरे बार-२ ऐसा कहने की बावजूद जब लोग इन दोनों महान व्यक्तित्व से मेरा बलिदान दिलवा ही दिए तो आप समझ सकते की मै स्वयं त्याग किया क्योंकि मै तो सब जानता क्या होने वाला है और यह त्याग बलिदान से भी ऊपर होता है क्योंकि बलिदान करने वाले को तो लोग जान जाते हैं पर उस समय प्रयागराज में मुझे कोई जनता भी नहीं था की मेरा स्मरण भी कर सके ?-----------हुआ यही की पूरी दुनिया हिन्दुमय हो गयी बिना किशी का धर्म परिवर्तन कराये स्वयं अपने धर्म की सीमा में ही रहकर और मै भी साबित रहा(पत्नी श्रीमती वन्दना पाण्डेय के दो पुत्रों विष्णुकांत और कृष्ण कान्त साथ) अपने स्वयं के जन्मदाता पिता की श्रद्धेय प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी:लक्ष्मीनारायण:सत्यनारायण) कुमार पाण्डेय की शक्ति के पुंज के रूप। मेरा यह कथन इस बात से प्रमाणित होता है की "जिसका मुझे अधिकार नहीं था, उसका भी बलिदान दिया" यह गीत मुझे सैकड़ों बार 2001 से लेकर 2005 तक इस प्रयागराज विश्व विद्यालय स्थित नेहरू विज्ञान केंद्र के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ययन केंद्र पर सुनाया गया था दो और गीत के साथ जिसको यहाँ देना प्रासंगिक नहीं है। आदमी अपना बलिदान कर सकता है पुत्र बलिदान कर सकता है पर अपने भतीजे और और भांजे का बलिदान कैसे कर सकता है और अगर उन्होंने ने किया और मै स्वीकार किया तो मै उन दोनों का भी पुत्र हुआ की नहीं। ---------मेरे पास विकल्प था इसका पर उससे इतना बड़ा परिवर्तन न होता केवल मेरी कुछ मुस्किल ही आसान होती और मई कुछ ज्यादा चर्चित होता इससे ज्यादा कुछ नहीं और इसी लिए मै इस सब के रचनाकार मेरे ताऊ जी और मामा जे के गुरु श्रेष्ठ जोशी जी को सादर नमन करता हूँ जो मेरे ननिहाल और गाँव दोनों जगह के गुरुश्रेष्ठ आज भी हैं। *******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।
पुनरावृत्ति: -----------------
संदेश:--------- वह महत्त्व और विश्वास जो मेरे दोनों गाँव बिशुनपुर-223103 (जौनपुर :जमदग्निपुर ) और रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़)को नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) में था वही महत्त्व और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) पर था जो सही साबित हुआ। विचारकों में विवेकानंद, टैगोर और नेहरू-गांधी के साथ-साथ सुभाष का समान महत्त्व था। पर इनके आदर्श केवल राम-कृष्ण-हनुमान:अम्बवादेकर:अम्बेडकर ही थे और आज भी हैं और जिनकी आस्था त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) और आदि देवी महादुर्गा(महा लक्ष्मी+महा सरस्वती+महा गौरी:पारवती) में ही थी और आज भी है।--------मै इस सामाजिक विषय के साथ आशान्वित हूँ की भारतीय जनमानस ऐसे ही नेतृत्व को जन्म दे जिनका की त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) भी प्रशंसा करें तो विश्व समाज उनका अपने आप प्रसंसा करेगा । ----------मै रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण देवव्रत-रामप्रसाद-बचनराम-प्रदीप का वंसज तो अपने ननिहाल बिशुनपुर-223103 के सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार के रामानंद((+देवव्रत(वंसज शंकर+अमरनाथ-+परमात्मा)+महेश(जिनके वंसज केदारनाथ))-श्रीनिवास-रामानुज-उत्तमा-रामप्रशाद-रमानाथ(+पारसनाथ)-श्रीकांत(+श्रीधर+श्रीप्रकाश) के उस द्वार पर जीवन के अधिकांश अंश जीने का अवसर पाकर धन्य हुआ जिस दरवाजे से गुजरने पर सिंह की भी दहाड़ मधुर हो जाती थी। उस समय यह थी मेरे नाना श्रद्धेय श्री रमानाथ मिश्र के सभ्यता और संस्कृति का असर जिनके सामने ब्रह्मा को ज्ञान, शिव को शक्ति और विष्णु को धन का गर्व/घमंड/मद न रह जाय और एक विनम्र और सुसंस्कृत व्यवहार से सज्जनता से पेश आएं।

फैज़ाबाद-अम्बेडकर नगर-सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ पुरातम अवध(कोसल) राज्य के प्रमुख जनपद (क्षेत्र) है जिनमे प्रतापगढ़ पर स्थानीय तौर पर प्रयागराज से जुड़ा होने की वजह से इस पर प्रयागराज की संस्कृति का विशेष प्रभाव है। आजमगढ़(आर्यमगढ़) और जौनपुर(जमदग्निपुर) दो ऐसे जनपद हैं जो काशी और अवध(कोसल) के लिए बफर जनपद सदा से रहे हैं जिसमे आजमगढ़ पर गोरखपुर(तराई) और काशी की संस्कृति का असर है इससे जुड़ा होने से और जौनपुर पर प्रयागराज और काशी की संस्कृति का असर है प्रयागराज से जुड़ा होने के कारन। भारतीय संस्कृति के मुख्य श्रोत प्रयाग(काशी)-अयोध्या(मथुरा-वृन्दावन) संस्कृति के वर्तमान में तीन प्रमुख स्थानीय सांस्कृतिक अंग हैं प्रयाग, काशी, और गोरखपुर(तराई संस्कृति जहां की प्राकृतिक-भौगोलिक स्थिति एक ब्राह्मण परिवार के भी खान-पान में परिवर्तन ला देती है पर विचार पर खान-पान यह भारी नहीं पड़ता है)।-----यहां यह बता देना अति आवश्यक है की जहां अवध(कोस्सल) पर शूर्यवंश/इक्शाकुवंस/रघुवंश/कश्यप गोत्रियों का शासन था वही आजमगढ़ जैसे कशी और अवध(कोसल) का बफर क्षेत्र है पर शक्तिशाली गौतम क्षत्रियों का शासन था जिसे(विक्रमादित्य/विक्रमजीत को) चंगेजखां तक नहीं हिला सका था और इसे छोड़ते हुए बिहार और बंगाल की तरफ आगे बढ़ गया था। लेकिन एक भारतीय ही सही एक इस्लाम के अनुयायी परिवार से हुए एक विवाह सम्बन्ध में आज़म और अज़मत एक तोहफे में मिले थे तो मित्र विवाह से यही होता है की हम बदल जाते हैं और अगर नहीं बदलते हैं तो फिर सब एक हो जाओ मेरी भी यही एक पुकार है?---------आप सर्त हार चुके है और आप के जीवन की अंतिम लौ है जो तेजी से जल और बुझ रही है पर हिंदी पंचांग के अनुसार आज मेरे जीवन के 39 वर्ष पूरे होने का अंतिम दिन है तो यह है की चरित्रवान ही सबसे बलवान होता है जिसके प्रमाण हनुमान:अम्बावडेकर:अम्बेडकर ही नहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण भी थे और यह दुनिया की निगाह है की वह श्रीकृष्ण को चरित्रहीन समझ लेती है और यह वही दुनिया है जो सीता को भी सही नहीं मानी और भगवान श्रीराम को भी मूर्ख बना दी।

फैज़ाबाद-अम्बेडकर नगर-सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ पुरातम अवध(कोसल) राज्य के प्रमुख जनपद (क्षेत्र) है जिनमे प्रतापगढ़ पर स्थानीय तौर पर प्रयागराज से जुड़ा होने की वजह से इस पर प्रयागराज की संस्कृति का विशेष प्रभाव है। आजमगढ़(आर्यमगढ़) और जौनपुर(जमदग्निपुर) दो ऐसे जनपद हैं जो काशी और अवध(कोसल) के लिए बफर जनपद सदा से रहे हैं जिसमे आजमगढ़ पर गोरखपुर(तराई) और काशी की संस्कृति का असर है इससे जुड़ा होने से और जौनपुर पर प्रयागराज और काशी की संस्कृति का असर है प्रयागराज से जुड़ा होने के कारन। भारतीय संस्कृति के मुख्य श्रोत प्रयाग(काशी)-अयोध्या(मथुरा-वृन्दावन) संस्कृति के वर्तमान में तीन प्रमुख स्थानीय सांस्कृतिक अंग हैं प्रयाग, काशी, और गोरखपुर(तराई संस्कृति जहां की प्राकृतिक-भौगोलिक स्थिति एक ब्राह्मण परिवार के भी खान-पान में परिवर्तन ला देती है पर विचार पर खान-पान यह भारी नहीं पड़ता है)।-----यहां यह बता देना अति आवश्यक है की जहां अवध(कोस्सल) पर शूर्यवंश/इक्शाकुवंस/रघुवंश/कश्यप गोत्रियों का शासन था वही आजमगढ़ जैसे कशी और अवध(कोसल) का बफर क्षेत्र है पर शक्तिशाली गौतम क्षत्रियों का शासन था जिसे(विक्रमादित्य/विक्रमजीत को) चंगेजखां तक नहीं हिला सका था और इसे छोड़ते हुए बिहार और बंगाल की तरफ आगे बढ़ गया था। लेकिन एक भारतीय ही सही एक इस्लाम के अनुयायी परिवार से हुए एक विवाह सम्बन्ध में आज़म और अज़मत एक तोहफे में मिले थे तो मित्र विवाह से यही होता है की हम बदल जाते हैं और अगर नहीं बदलते हैं तो फिर सब एक हो जाओ मेरी भी यही एक पुकार है?---------आप सर्त हार चुके है और आप के जीवन की अंतिम लौ है जो तेजी से जल और बुझ रही है पर हिंदी पंचांग के अनुसार आज मेरे जीवन के 39 वर्ष पूरे होने का अंतिम दिन है तो यह है की चरित्रवान ही सबसे बलवान होता है जिसके प्रमाण हनुमान:अम्बावडेकर:अम्बेडकर ही नहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण भी थे और यह दुनिया की निगाह है की वह श्रीकृष्ण को चरित्रहीन समझ लेती है और यह वही दुनिया है जो सीता को भी सही नहीं मानी और भगवान श्रीराम को भी मूर्ख बना दी।

आप सर्त हार चुके है और आप के जीवन की अंतिम लौ है जो तेजी से जल और बुझ रही है पर हिंदी पंचांग के अनुसार आज मेरे जीवन के 39 वर्ष पूरे होने का अंतिम दिन है तो यह है की चरित्रवान ही सबसे बलवान होता है जिसके प्रमाण हनुमान:अम्बावडेकर:अम्बेडकर ही नहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण भी थे और यह दुनिया की निगाह है की वह श्रीकृष्ण को चरित्रहीन समझ लेती है और यह वही दुनिया है जो सीता को भी सही नहीं मानी और भगवान श्रीराम को भी मूर्ख बना दी। ---------स्वेक्षाचीरियों और व्यभिचारियों को सजा देने के बदले मुझे सजा दिए थे आप 2000। क्या आप इतने योग्य हो गए थे? उत्तर है नहीं? फिर कुछ मेरे बहुत सिमित सामाजिक ज्ञान को देखिये जिसमे कुछ क्रिमिनल कार्य लग रहा है की नहीं जिसमे एक भी पताका भी नहीं फूटा बम की बात ही दूर और न कोई सामने आया था? सब अंदर ही अंदर हो रहा था आप जिस विश्वविद्यालय में थे वह बहुत ही शांत दिखाई देता था और जब मै मानवता के कारन सामने आ गया तो बहुत कुछ हो गया?जिन लोगों ने राजाराम छात्रावास में इन सब कार्यों(व्यभिचारियों और सुरा-सुंदरियों के शौक़ीन तैयार करना उच्चतम शिक्षा केंद्र से जो भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े केंद्र पर है) को बढ़ावा देने हेतु और TV6 जैसे अश्लील चैनेल को पहुंचाया और मस्तराम और अन्य काम वासना को प्रेरित करने वाले कथाकारों को कहानियों सभी छात्रावासों में पहुंचाया इसके बदले प्रतिभा पलायन हेतु उनको आप ने दंड क्यों नहीं दिया नहीं दिया जिन लोगों के कार्यों का नतीजा था अप्रैल, 2000 की शर्मनाक घटना। वे भारतीय विदेशी एजेंट जो भारतीय बौद्धिक शक्ति को लगातार बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं क्या उनको आप का धृतराष्ट्र जैसा समर्थन था ? और इस कार्य में तथाकथित सामाजिक न्याय के ठीकेदार राजनेता और स्वयं सेवी संस्थाएं भी जिम्मेदार हैं जिनको विवेक पाण्डेय बहुत धनी लगते हैं पर जब स्वार्थ की बात आती है तो बहुत ही बड़े शूद्र और दरिद्र नजर आते हैं। कैसा पैमाना है आप का जो फेल हो बार-बार? अपने मेरा एक बार भी किशी टाकीज में प्रवेश का प्रमाण दिला दे सिगरा की बात ही दूर है जिसमे अश्लील शो चलता था। जब विमान अपहरण होता है और एक MCA का मुस्लिम छात्र खुले आम उसका समर्थन करता है तो उसको चुप कराने मुझे बुलाया जाता है(मै भी तब शायद उसकी भासा नहीं समझा पर चुप करा दिया था लेकिन अब समझा की यह तो मुस्लिमों का ही नहीं वर्ण पूरे हिन्दुस्तान का ईसाई कारन हो रहा हिन्दू रहते ही जबकि हिन्दू और उसके अनुसांगिक धर्म; तथा मुसिम और ईसाई का संतुलन ठीक होना चाहिए न की एक बेतहासा बढे या घटे। जब मुस्लिम श्रीराम के सामानांतर और ईसाई श्रीकृष्ण के सामानांतर तो कोई श्रीराम और श्रीकृष्ण में से कोई भी समूल नस्ट होगा तो यह दुनिया उसी दिन नस्ट हो जाएगी )। ----चरित्रवान और योग्य समाज के सम्मुख या तो चरित्रहीन की आवाज धीमी होती है या बहुत ही सुलझे हुए व्यक्तित्व की जिसकी यह एक शैली बन जाती है।



आप सर्त हार चुके है और आप के जीवन की अंतिम लौ है जो तेजी से जल और बुझ रही है पर हिंदी पंचांग के अनुसार आज मेरे जीवन के 39 वर्ष पूरे होने का अंतिम दिन है तो यह है की चरित्रवान ही सबसे बलवान होता है जिसके प्रमाण हनुमान:अम्बावडेकर:अम्बेडकर ही नहीं श्रीराम और श्रीकृष्ण भी थे और यह दुनिया की निगाह है की वह श्रीकृष्ण को चरित्रहीन समझ लेती है और यह वही दुनिया है जो सीता को भी सही नहीं मानी और भगवान श्रीराम को भी मूर्ख बना दी। ---------स्वेक्षाचीरियों और व्यभिचारियों को सजा देने के बदले मुझे सजा दिए थे आप 2000। क्या आप इतने योग्य हो गए थे? उत्तर है नहीं? फिर कुछ मेरे बहुत सिमित सामाजिक ज्ञान को देखिये जिसमे कुछ क्रिमिनल कार्य लग रहा है की नहीं जिसमे एक भी पताका भी नहीं फूटा बम की बात ही दूर और न कोई सामने आया था? सब अंदर ही अंदर हो रहा था आप जिस विश्वविद्यालय में थे वह बहुत ही शांत दिखाई देता था और जब मै मानवता के कारन सामने आ गया तो बहुत कुछ हो गया?जिन लोगों ने राजाराम छात्रावास में इन सब कार्यों(व्यभिचारियों और सुरा-सुंदरियों के शौक़ीन तैयार करना उच्चतम शिक्षा केंद्र से जो भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े केंद्र पर है) को बढ़ावा देने हेतु और TV6 जैसे अश्लील चैनेल को पहुंचाया और मस्तराम और अन्य काम वासना को प्रेरित करने वाले कथाकारों को कहानियों सभी छात्रावासों में पहुंचाया इसके बदले प्रतिभा पलायन हेतु उनको आप ने दंड क्यों नहीं दिया नहीं दिया जिन लोगों के कार्यों का नतीजा था अप्रैल, 2000 की शर्मनाक घटना। वे भारतीय विदेशी एजेंट जो भारतीय बौद्धिक शक्ति को लगातार बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं क्या उनको आप का धृतराष्ट्र जैसा समर्थन था ? और इस कार्य में तथाकथित सामाजिक न्याय के ठीकेदार राजनेता और स्वयं सेवी संस्थाएं भी जिम्मेदार हैं जिनको विवेक पाण्डेय बहुत धनी लगते हैं पर जब स्वार्थ की बात आती है तो बहुत ही बड़े शूद्र और दरिद्र नजर आते हैं। कैसा पैमाना है आप का जो फेल हो बार-बार? अपने मेरा एक बार भी किशी टाकीज में प्रवेश का प्रमाण दिला दे सिगरा की बात ही दूर है जिसमे अश्लील शो चलता था। जब विमान अपहरण होता है और एक MCA का मुस्लिम छात्र खुले आम उसका समर्थन करता है तो उसको चुप कराने मुझे बुलाया जाता है(मै भी तब शायद उसकी भासा नहीं समझा पर चुप करा दिया था लेकिन अब समझा की यह तो मुस्लिमों का ही नहीं वर्ण पूरे हिन्दुस्तान का ईसाई कारन हो रहा हिन्दू रहते ही जबकि हिन्दू और उसके अनुसांगिक धर्म; तथा मुसिम और ईसाई का संतुलन ठीक होना चाहिए न की एक बेतहासा बढे या घटे। जब मुस्लिम श्रीराम के सामानांतर और ईसाई श्रीकृष्ण के सामानांतर तो कोई श्रीराम और श्रीकृष्ण में से कोई भी समूल नस्ट होगा तो यह दुनिया उसी दिन नस्ट हो जाएगी )। ----चरित्रवान और योग्य समाज के सम्मुख या तो चरित्रहीन की आवाज धीमी होती है या बहुत ही सुलझे हुए व्यक्तित्व की जिसकी यह एक शैली बन जाती है।

Tuesday, October 28, 2014

संदेश:--------- वह महत्त्व और विश्वास जो मेरे दोनों गाँव बिशुनपुर-223103 (जौनपुर :जमदग्निपुर ) और रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़)को नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) में था वही महत्त्व और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) पर था जो सही साबित हुआ। विचारकों में विवेकानंद, टैगोर और नेहरू-गांधी के साथ-साथ सुभाष का समान महत्त्व था। पर इनके आदर्श केवल राम-कृष्ण-हनुमान:अम्बवादेकर:अम्बेडकर ही थे और आज भी हैं और जिनकी आस्था त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) और आदि देवी महादुर्गा(महा लक्ष्मी+महा सरस्वती+महा गौरी:पारवती) में ही थी और आज भी है।--------मै इस सामाजिक विषय के साथ आशान्वित हूँ की भारतीय जनमानस ऐसे ही नेतृत्व को जन्म दे जिनका की त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) भी प्रशंसा करें तो विश्व समाज उनका अपने आप प्रसंसा करेगा । ----------मै रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण देवव्रत-रामप्रसाद-बचनराम-प्रदीप का वंसज तो अपने ननिहाल बिशुनपुर-223103 के सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार के रामानंद((+देवव्रत(वंसज शंकर+अमरनाथ+परमात्मा)+महेश(जिनके वंसज केदारनाथ))-श्रीनिवास-रामानुज-उत्तमा-रामप्रशाद-रमानाथ(+पारसनाथ)-श्रीकांत(+श्रीधर+श्रीप्रकाश) के उस द्वार पर जीवन के अधिकांश अंश जीने का अवसर पाकर धन्य हुआ जिस दरवाजे से गुजरने पर सिंह की भी दहाड़ मधुर हो जाती थी। उस समय यह थी मेरे नाना श्रद्धेय श्री रमानाथ मिश्र के सभ्यता और संस्कृति का असर जिनके सामने ब्रह्मा को ज्ञान, शिव को शक्ति और विष्णु को धन का गर्व/घमंड/मद न रह जाय और एक विनम्र और सुसंस्कृत व्यवहार से सज्जनता से पेश आएं।

संदेश:--------- वह महत्त्व और विश्वास जो मेरे दोनों गाँव बिशुनपुर-223103 (जौनपुर :जमदग्निपुर ) और रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़)को नेहरू-गांधी-पटेल(इंदिरा) में था वही महत्त्व और विश्वास जोशी-अटल-आडवाणी(आद्यवाणी) पर था जो सही साबित हुआ। विचारकों में विवेकानंद, टैगोर और नेहरू-गांधी के साथ-साथ सुभाष का समान महत्त्व था। पर इनके आदर्श केवल राम-कृष्ण-हनुमान:अम्बवादेकर:अम्बेडकर  ही थे और आज भी हैं और जिनकी आस्था त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) और आदि देवी महादुर्गा(महा लक्ष्मी+महा सरस्वती+महा गौरी:पारवती) में ही थी और आज भी है।--------मै इस सामाजिक विषय के साथ आशान्वित हूँ की भारतीय जनमानस ऐसे ही नेतृत्व को जन्म दे जिनका की त्रिदेव(परमब्रह्म=ब्रह्मा-विष्णु-महेश) भी प्रशंसा करें तो विश्व समाज उनका अपने आप प्रसंसा करेगा । ----------मै रामपुर-223225 (आजमगढ़:आरयमगढ़) के सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण देवव्रत-रामप्रसाद-बचनराम-प्रदीप का वंसज तो अपने ननिहाल बिशुनपुर-223103 के सनातन गौतम गोत्रीय वयासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार के रामानंद((+देवव्रत(वंसज शंकर+अमरनाथ+परमात्मा)+महेश(जिनके वंसज केदारनाथ))-श्रीनिवास-रामानुज-उत्तमा-रामप्रशाद-रमानाथ(+पारसनाथ)-श्रीकांत(+श्रीधर+श्रीप्रकाश) के उस द्वार पर जीवन के अधिकांश अंश जीने का अवसर पाकर धन्य हुआ जिस दरवाजे से गुजरने पर सिंह की भी दहाड़ मधुर हो जाती थी। उस समय यह थी मेरे नाना श्रद्धेय श्री रमानाथ मिश्र के सभ्यता और संस्कृति का असर जिनके सामने ब्रह्मा को ज्ञान, शिव को शक्ति और विष्णु को धन का गर्व/घमंड/मद न रह जाय और एक विनम्र और सुसंस्कृत व्यवहार से सज्जनता से पेश आएं।
https://archive.today/4HDpi
http://en.wikipedia.org/wiki/Prem_Chand_Pandey
http://en.wikipedia.org/wiki/User:Vivek_Kumar_Pandey
https://profiles.google.com/vkpandey75/about?hl=en
http://en.wikipedia.org/wiki/Bishunpur-Jaunpur
http://en.wikipedia.org/wiki/Ramapur

Monday, October 27, 2014

Swami Vivekanand was died in the age of 39 and I am also originally and most probably at the age of 39(11-11-2014) and he has also connection with the IISc Bangalore and I join there at the age of 100 of the IISc Bangalore.

Swami Vivekanand was died in the age of 39 and I am also originally and most probably at the age of 39(11-11-2014) and he has also connection with the IISc Bangalore and I join there at the age of 100 of the IISc Bangalore.

आज के 7 वर्ष पूर्व मुझे भारतीय विज्ञान संस्थान में कुलसचिव के रोजगार पत्रांकानुसार वायुमंडलीय एवं समुद्रीय विज्ञान केंद्र में परियोजना पराशोधक-अनुसंधानसहयोगी के रूप में कार्य करने हेतु सेवा का अवसर मिला(27-10-2007 से जबकि यह 25-10-2007 से ही अनुदेशित था पर व्यवहारिक त्रुटि बताकर 25 को ही नहीं मिला था अवसर) था और यह 27-10-2009 तक मतलब पूर्ण रूप से 2 वर्ष वहा रहा जो एक न्यूनतम शोध अवधि होती है। उसके बाद आज से 5 वर्ष पूर्व 29-10-2009 को प्रयागराज विश्वविद्यालय के कुलसचिव के पत्रांकानुसार यहाँ एक शिक्षक के रूप में सेवा करने का अवसर मिला और आज (28-10-2014) उसी सेवाअवधि के सुचारू रूप से कार्य के 5 वर्ष पूरे हो रहे हैं इसके लिए वाह्य सहयोग हेतु आप सभी शुभचिंतकों को धन्यवाद। और इन 7 वर्षों में मैंने भारतीय जनमानस सहित विश्व जनमानस जाग्रति का कार्य भी अपने सोसल वेब पेज से किया है ऑरकुट (2005 -2010), ब्लॉग (2007 -आज तक) और फेसबुक (2008-आज तक) पर एक शिक्षित समाज जिसको धर्म और दर्शन को जानने और समझने के लिए प्रारंभिक आधार एक जगह नहीं मिलता है उसके लिए मेरा ब्लॉग " Vivekanand and Modern Tradition" एक बहुत बड़ी संजीविनी है जिसे वैसे मई लिखता और मिटता रहता हूँ पर अगस्त, 2013 से अब तक का अब नहीं मिटाऊंगा विश्व जनमानस और मानवहित को देखते हुए। और आज से मै विशेष रूप से इस विकिरित ऊर्जा को पुनः अपने व्यवहार और कार्य में संचित करूंगा जो विश्वजनमानस हित में स्वयं को गलाकर उत्सर्जित की गयी है।