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Thursday, November 20, 2014

हनुमान/अम्बवादेकर/अम्बेडकर/बनर्जी/शंकर-सुमन/रूद्र(शिवा)अवतार/पवनसुत/मारुतिनंदन/बजरंग-बलि/महावीर/केशरीनन्दन और मेघनाद/रावण-सुपुत्र के बीच सम्बन्ध गोस्वामी श्री तुलसीदास के इन्ही चौपाइयों से स्पस्ट है जो हनुमान का रावण को उत्तर और सीख है: जनेऊ मै तुम्हारी प्रभुताई, सहसबाहु सन परी लड़ाई। समर बाली सन करि जस पावा, सुनी कपि बचन बिहँसि बिहरावा। खायो फल प्रभु लागि भूखा, कपि सुभाव ते तोरेउ रूखा। सब के देख परम प्रिय स्वामी, मारइ मोहि कुमारग गामी।। जिन्ह मोहि मारा ते मई मारे, तेहि पर बांधें तनय तुम्हारे। मोहि ना कछु बड़ ही कै लाजा, कीन्ह चहु निज प्रभु कर काजा।। विनती करउ जोरि कर रावण, सुनहु मान तजि मोर सिखावन। देखउ तुम्ह निज कुलहि बिचारी, भ्रम तजि भजौ भगत भय हारी।। जाके डर अति काल डेराई, जो सुर असुर चराचर खाई। तासो बयरु कबहु नहीं कीजै, मोरे कहे जानकी दीजै।। "I am aware of your glory: you had an encounter with Sahasrabahu and won distinction in your contest with Baali" Ravana heard the words of Hanuman but laughed them away. "I eat the fruit because I felt hungry and broke the boughs as a monkey is wont to do. One's body, my master, is supremely dear to all; yet those wicked fellows would insist on belabouring me, so that I had no course left but to return their blows. Still your son (Meghanad) put me in bonds; but I am not at all ashamed of being bound, keen as I am to serve the cause of my lord. I implore you with joined palms, Ravana: give up your haughtiness and heed my advice. Think of your lineage and view things in that perspective; in any case disillusion yourself and adore Him who dispels the fear of His devotees. Never antagonize Him who is a source of terror even to Death, that devours all created beings, both animate and inanimate, gods as well as demons. And return Janaka's Daughter at my request.

हनुमान/अम्बवादेकर/अम्बेडकर/बनर्जी/शंकर-सुमन/रूद्र(शिवा)अवतार/पवनसुत/मारुतिनंदन/बजरंग-बलि/महावीर/केशरीनन्दन और मेघनाद/रावण-सुपुत्र के बीच सम्बन्ध गोस्वामी श्री तुलसीदास के इन्ही चौपाइयों से स्पस्ट है जो हनुमान का रावण को उत्तर और सीख है:
जनेऊ मै तुम्हारी प्रभुताई, सहसबाहु सन परी लड़ाई।
समर बाली सन करि जस पावा, सुनी कपि बचन बिहँसि बिहरावा।
खायो फल प्रभु लागि भूखा, कपि सुभाव ते तोरेउ रूखा।
सब के देख परम प्रिय स्वामी, मारइ मोहि कुमारग गामी।।
जिन्ह मोहि मारा ते मई मारे, तेहि पर बांधें तनय तुम्हारे।
मोहि ना कछु बड़ ही कै लाजा, कीन्ह चहु निज प्रभु कर काजा।।
विनती करउ जोरि कर रावण, सुनहु मान तजि मोर सिखावन।
देखउ तुम्ह निज कुलहि बिचारी, भ्रम तजि भजौ भगत भय हारी।।
जाके डर अति काल डेराई, जो सुर असुर चराचर खाई।
तासो बयरु कबहु नहीं कीजै, मोरे कहे जानकी दीजै।।

"I am aware of your glory: you had an encounter with Sahasrabahu and won
distinction in your contest with Baali" Ravana heard the words of Hanuman but laughed them away. "I eat the fruit because I felt hungry and broke the boughs as a monkey is wont to do. One's body, my master, is supremely dear to all; yet those wicked fellows would insist on belabouring me, so that I had no course left but to return their blows. Still your son (Meghanad) put me in bonds; but I am not at all ashamed of being bound, keen as I am to serve the cause of my lord. I implore you with joined palms, Ravana: give up your haughtiness and heed my advice. Think of your lineage and view things in that perspective; in any case disillusion yourself and adore Him who dispels the fear of His devotees. Never antagonize Him who is a source of terror even to Death, that devours all created beings, both animate and inanimate, gods as well as demons. And return Janaka's Daughter at my request.

Wednesday, November 19, 2014

I am waiting for the day when the present Honorable India Prime Minister will say "Jai Hind" with the words "Bharat Maan ki Jai"="Jai Bharat". ---------This will be great day for the Indian forces and their associated wings on behalf of the Prime Minister.-----------This is the alumnus of The Ram-Krishna Hostel, Banaras Hindu University (काशी हिन्दू विश्व विद्यालय) and thus itself of The Banaras Hindu University (काशी हिन्दू विश्व विद्यालय), Alumnus of Gandhi Smarak Post-Graduate College, Samaodhpur (Under Veer Bahadur Singh Purvanchal University, Jaunpur) and Alumnus of National Inter College Pattinarendrapur, Jaunpur and also Associate alumnus of Indian Institute of Science and Proud Past Alumni and Assistant Professor of the University of Allahabad; and an Ex-NCC Cadet of Army wing having Position in written in 96 UPBN/Jaunpur/Varanasi: --- Ram-Krishna was the Paramguru Parampita Parameshwar of Swami Vivekanand (Narendra Nath Datta) and Know as Ram-Krishna Paramhans.



I am waiting for the day when the present Honorable India Prime Minister will say "Jai Hind" with the words "Bharat Maan ki Jai"="Jai Bharat". ---------This will be great day for the Indian forces and their associated wings on behalf of the Prime Minister.-----------This is the alumnus of The Ram-Krishna Hostel, Banaras Hindu University (काशी हिन्दू विश्व विद्यालय) and thus itself of The Banaras Hindu University (काशी हिन्दू विश्व विद्यालय), Alumnus of Gandhi Smarak Post-Graduate College, Samaodhpur (Under Veer Bahadur Singh Purvanchal University, Jaunpur) and Alumnus of National Inter College Pattinarendrapur, Jaunpur and also Associate alumnus of Indian Institute of Science and Proud Past Alumni and Assistant Professor of the University of Allahabad; and an Ex-NCC Cadet of Army wing having Position in written in 96 UPBN/Jaunpur/Varanasi: --- Ram-Krishna was the Paramguru Parampita Parameshwar of Swami Vivekanand (Narendra Nath Datta) and Know as Ram-Krishna Paramhans.

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

Tuesday, November 18, 2014

जिसने 11 सितम्बर, 2001 को केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ययन केंद्र, प्रयागराज विश्वविद्यालय में कदम रखा था वह धर्म ही था जिसने इस श्रिस्टी को अपनी सहनशीलता, चातुर्य और पुरुषार्थ से एक बहुत बड़े महा विनाश से बचा लिया और चौदह वर्ष में जो भी थोड़ी छति हुई थी छोटे महाविनाश से उसकी भरपाई कर इस श्रिस्टी का नवसृजन कर दिया पर इस चेतावनी के साथ की सज्जन व्यक्तियों के जीवन संसार को पुनः बाहुबलियों और धनपशुओं के इसारे पर नस्ट किया गया और उनको इस संसार का शूद्रतम और अधतम व्यक्ति शिध्ध करने के लिए कपोल कल्पित अनर्गल प्रचार किया गया किशी शूद्र कर्म वाले व्यक्ति को महिमा मंडित करने के उद्देश्य से किशी निजी स्वार्थ में तो इस तरह की घटनाएं होंगी और इसके बाद इससे बड़ा महा विनाश होगा और इसे वह धर्म भी नहीं बचाएगा बल्कि उसे धर्म की रक्षा ही सिद्ध करेगा।

 जिसने 11 सितम्बर, 2001 को केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ययन केंद्र, प्रयागराज विश्वविद्यालय में कदम रखा था वह धर्म ही था जिसने इस श्रिस्टी को अपनी सहनशीलता, चातुर्य और पुरुषार्थ से एक बहुत बड़े महा विनाश से बचा लिया और चौदह वर्ष में जो भी थोड़ी छति हुई थी छोटे महाविनाश से उसकी भरपाई कर इस श्रिस्टी का नवसृजन कर दिया पर इस चेतावनी के साथ की सज्जन व्यक्तियों के जीवन संसार को पुनः बाहुबलियों और धनपशुओं के इसारे पर नस्ट किया गया और उनको इस संसार का शूद्रतम और अधतम व्यक्ति शिध्ध करने के लिए कपोल कल्पित अनर्गल प्रचार किया गया किशी शूद्र कर्म वाले व्यक्ति को महिमा मंडित  करने के उद्देश्य से किशी निजी स्वार्थ में तो इस तरह की घटनाएं होंगी और इसके बाद इससे बड़ा महा विनाश होगा और इसे वह धर्म भी नहीं बचाएगा बल्कि उसे धर्म की रक्षा ही सिद्ध करेगा। 

Monday, November 17, 2014

शिव मंत्र: कर्पूरगौरं करुणावतारम् |संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् || सदा वसन्तं हृदयारविन्दे |भवं भवानि सहितं नमामि || I salute the merciful Bhava (i.e. Shiva), and his consort Sati, Adorned with the necklace of the serpent. Word to Word Meaning: Karpur Gauram: The one who is as pur/white as a campho(karpur) Karuna avatar : The personification of compassion Sansara Saram : The one who is the essence of the world Bhujagendra haram: The one with the serpent king as his garland Sada vasantam : Always residing Hridaya arvinde: In the lotus of the heart Bhavam Bhavani: Oh Lord and Goddess (Sati: wife of Shiva) Sahitam Namami: I bow to you both

शिव मंत्र:  कर्पूरगौरं करुणावतारम् |संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ||
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे |भवं भवानि सहितं नमामि ||
I salute the merciful Bhava (i.e. Shiva), and his consort Sati, Adorned with the necklace of the serpent.
Word to Word Meaning:
Karpur Gauram: The one who is as pur/white as a campho(karpur)
Karuna avatar : The personification of compassion
Sansara Saram : The one who is the essence of the world
Bhujagendra haram: The one with the serpent king as his garland
Sada vasantam : Always residing
Hridaya arvinde: In the lotus of the heart
Bhavam Bhavani: Oh Lord and Goddess (Sati: wife of Shiva)
Sahitam Namami: I bow to you both

Lord Kedareswar:Aadi Shankar:Shiva is Lord of Five Prime Elements: Panch Mahabhoot(Water, Fire, Land, Space:Atmosphere and air) of the Universe; Mahamrityunjay is sensation of life in these elements and Vishveshwar :Wishvanath is Governing body. These three power's: Kedareswar: AAdi Shankar, Mahamrityunjay and Vishweshwar:Wishvanath of the Lord Shiva is called the TRISHUL POWER of Lord Shiva with and with these Trishul power Lord Shiva first come at the Kashi/ Varanasi/ Banaras and thus he called the Aadi Dev i.e. the Mahadev Bholenath Shiv Shankar. After Kashi he migrated to Kailash for peaceful place.

Lord Kedareswar:Aadi Shankar:Shiva is Lord of Five Prime Elements: Panch Mahabhoot(Water, Fire, Land, Space:Atmosphere and air) of the Universe; Mahamrityunjay is sensation of life in these elements and Vishveshwar :Wishvanath is Governing body. These three power's: Kedareswar: AAdi Shankar, Mahamrityunjay and Vishweshwar:Wishvanath of the Lord Shiva is called the TRISHUL POWER of Lord Shiva with and with these Trishul power Lord Shiva first come at the Kashi/ Varanasi/ Banaras and thus he called the Aadi Dev i.e. the Mahadev Bholenath Shiv Shankar. After Kashi he migrated to Kailash for peaceful place.


मंगला चरण विष्णु मंत्र : मंगलम्‌‌ भगवान विष्‍‍णुः, मंगलम्‌‌ गरुड़ध्‍वज:(गरुण ध्वज वाले विष्णु)| मंगलम्‌‌ पण्‍डरीकाक्षः((पुण्डरीक(कमलवत) +अक्ष(आँख)), ‍ मंगलाय त्नोहरि|। -----------------------मंगला चरण विष्णु मंत्र --------------- मंगलम्‌‌ भगवान विष्‍‍णुः, मंगलम्‌‌ गरुड़ध्‍वज:(गरुण ध्वज वाले विष्णु)| मंगलम्‌‌ पण्‍डरीकाक्षः((पुण्डरीक(कमलवत) +अक्ष(आँख)), ‍ मंगलाय त्नोहरि|। Meaning Auspicious is Lord Vishnu, auspicious is the bearer of the Garuda flag (Lord Vishnu), auspicious is the Lotus-Eyed (Lord Vishnu), all auspiciousness is Hari (Lord Vishnu). Word by Word Translation Mangalam = Auspicious Bhagwan = Lord Vishnu = Vishnu Mangalam = Auspicious Garuda = Lord Vishnu's Vahan (Vehicle) / the Mythical Eagle Dhwaja = Flag Mangalam = Auspicious Pundareekaksham = Eyes like Lotus Mangalaya = Auspicious Tano = Form Hari = Lord Vishnu

मंगला चरण विष्णु मंत्र :  मंगलम्‌‌ भगवान विष्‍‍णुः,  मंगलम्‌‌ गरुड़ध्‍वज:(गरुण ध्वज वाले विष्णु)|
मंगलम्‌‌ पण्‍डरीकाक्षः((पुण्डरीक(कमलवत) +अक्ष(आँख)), ‍ मंगलाय त्नोहरि|। 


-----------------------मंगला चरण विष्णु मंत्र ---------------
  मंगलम्‌‌ भगवान विष्‍‍णुः,  मंगलम्‌‌ गरुड़ध्‍वज:(गरुण ध्वज वाले विष्णु)|
मंगलम्‌‌ पण्‍डरीकाक्षः((पुण्डरीक(कमलवत) +अक्ष(आँख)), ‍ मंगलाय त्नोहरि|।

Meaning

Auspicious is Lord Vishnu, auspicious is the bearer of the Garuda flag (Lord Vishnu), auspicious is the Lotus-Eyed (Lord Vishnu), all auspiciousness is Hari (Lord Vishnu).

Word by Word Translation

Mangalam = Auspicious
Bhagwan = Lord
Vishnu = Vishnu

Mangalam = Auspicious
Garuda = Lord Vishnu's Vahan (Vehicle) / the Mythical Eagle
Dhwaja = Flag

Mangalam = Auspicious
Pundareekaksham = Eyes like Lotus

Mangalaya = Auspicious
Tano = Form

Hari = Lord Vishnu

शिव मंत्र: 
कर्पूरगौरं करुणावतारम् |
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ||
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे |
भवं भवानि सहितं नमामि ||
I salute the merciful Bhava (i.e. Shiva), and his consort Sati, Adorned with the necklace of the serpent.
Word to Word Meaning:
Karpur Gauram: The one who is as pur/white as a campho(karpur)
Karuna avatar : The personification of compassion
Sansara Saram : The one who is the essence of the world
Bhujagendra haram: The one with the serpent king as his garland
Sada vasantam : Always residing
Hridaya arvinde: In the lotus of the heart
Bhavam Bhavani: Oh Lord and Goddess (Sati: wife of Shiva)
Sahitam Namami: I bow to you both