Google+ Followers

Saturday, January 24, 2015

सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।



सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।

विष्णु के सहस्र(एक हजार प्रचलित नाम) नाम में से एक नाम नारायण है जिसका अर्थ है नर का अवतार लेने वाला परन्तु सर्वोच्च नाम "विष्णु" है तभी तो इनके नाम से बने पुराण का नाम "विष्णु पुराण" रखा गया है न की नारायण पुराण और उनके सबसे प्रिय मानव भक्त ध्रुव ने विष्णु नाम का ही जाप किया था और उसे ही सर्वोच्च बताया था जवकि इसका उच्चारण कुछ कठिन जरूर है। ---उसी प्रकार दिगंबर/नीलकंठ/नीलाम्बर महादेव के भी अनेको नाम है पर "शिव" नाम सर्वोच्च है और तभी इनके नाम से बने पुराण का नाम भी "शिव पुराण" है। ---------नारायण बहुत से देवताओं के नाम के आगे लगा दिया जाता है जिसका अर्थ है उस देवता का मानव अवतार न की वह देवता जबकि विशेष रूप से विष्णु का मानव अवतार ही इस संसार को दृस्टिगट होता है ।



विष्णु के सहस्र(एक हजार प्रचलित नाम) नाम में से एक नाम नारायण है जिसका अर्थ है नर का अवतार लेने वाला परन्तु सर्वोच्च नाम "विष्णु" है तभी तो इनके नाम से बने पुराण का नाम "विष्णु पुराण" रखा गया है न की नारायण पुराण और उनके सबसे प्रिय मानव भक्त ध्रुव ने विष्णु नाम का ही जाप किया था और उसे ही सर्वोच्च बताया था जवकि इसका उच्चारण कुछ कठिन जरूर है। ---उसी प्रकार दिगंबर/नीलकंठ/नीलाम्बर महादेव के भी अनेको नाम है पर "शिव" नाम सर्वोच्च है और तभी इनके नाम से बने पुराण का नाम भी "शिव पुराण" है। ---------नारायण बहुत से देवताओं के नाम के आगे लगा दिया जाता है जिसका अर्थ है उस देवता का मानव अवतार न की वह देवता जबकि विशेष रूप से विष्णु का मानव अवतार ही इस संसार को दृस्टिगट होता है ।

शाण्डिया(शान:पूर्ण + दिल्य:चन्द्रमा= पूर्ण चन्द्र) तो समझ में आ गया होगा की वृष्णि/यदु/चन्द्रवंशीय श्रीकृष्ण के गुरु वर्तमान मध्य प्रदेश के शांडिल्य आश्रम के तत्कालीन शांडिल्य गोत्रीय संदीपन ऋषि से शिक्षा क्यों दिलवा? क्यों राश्लीला और कंश वध बाद उनके भौतिक पिता वशुदेव/देवकी ने वाशुदेव श्रीकृष्ण को बाबा नंदराय/यशोदा के कुलगुरु गर्ग से शिक्षा न दिलवा अपने कुलगुरु शांडिल्य ऋषि के पास भेजा था ?

शाण्डिया(शान:पूर्ण + दिल्य:चन्द्रमा= पूर्ण चन्द्र) तो समझ में आ गया होगा की वृष्णि/यदु/चन्द्रवंशीय श्रीकृष्ण के गुरु वर्तमान मध्य प्रदेश के शांडिल्य आश्रम के तत्कालीन शांडिल्य गोत्रीय संदीपन ऋषि से शिक्षा क्यों दिलवा?  क्यों राश्लीला और कंश वध बाद उनके भौतिक पिता वशुदेव/देवकी ने वाशुदेव श्रीकृष्ण को बाबा नंदराय/यशोदा के कुलगुरु गर्ग से शिक्षा न दिलवा अपने कुलगुरु शांडिल्य ऋषि के पास भेजा था ?

एक बार पुनः कश्यप कुल की कन्या का वशिष्ठ से विवाह होता है और शाण्डिय का कश्मीर (modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India) में जन्म होता है। अतः शांडिल्य कश्यप और वशिष्ठ युग्म की उत्पत्ति हुए और सप्तर्षि के व्युत्पन हुए। One rishi was a son of the Sage/Rishi Vashistha and grandson(dauther's son) of the Sage/RishiKashyapa| Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town| Rishi/Sage Kashyapa is Originator of Kashmir| जो मामा को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से छोटे और जो भांजे को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से बड़े( कश्यप ऋषि ही दशरथ और वशुदेव के रूप में अवतार लिए थे विष्णु के आह्वान पर उनका पिता बनने के लिए अतः कुछ लोग भ्रान्ति फैलाते हैं की दशरथ के बहन का विवाह वशिष्ठ से हुआ था)। ------गर्ग स्वयं भारद्वाज की शिष्य परम्परा के पुत्र हुए थे और भारद्वाज स्वयं बाल्मीकि के शिष्य और यही बाल्मीकि कश्यप के पुत्र वरुणदेव के पुत्र थे जो वन गमन किये थे किंचित कारणों से अतः गर्ग ऋषि भी कश्यप से सम्बंधित है और कश्यप कुल की शिष्य परम्परा में आते हैं। ---------अतः गर्ग, गौतम और शांडिल्य की श्रेणी होते हुए भी गौतम सप्तर्षि में आते हैं न की गर्ग और शांडिल्य की तरह व्युत्पन है और इस प्रकार कश्यप से श्रेष्ठ और पूज्य क्रमशः गौतम और वशिष्ठ ही हुए और इस प्रकार अन्य चार सप्तर्षियों या सनातन गोत्रियों के लिए तथा व्युत्पन गोत्रियों के लिए भी गौतम और वशिष्ठ श्रेष्ठ हुए लेकिन उनके लिए गर्ग, गौतम और शांडिल्य का क्रम विशेष माने रखता है शूर्यवंश/इक्शाकुवंश/रघुवंश/रामकुल में रावण जैसे ब्राह्मणकुल का नाश काने के उपरांत उनके अश्वमेध यज्ञ में शामिल होने और खान-पान करने के कारन। Sandilya (Rishi): Śāṇḍilya (Sanskrit: शाण्डिल्य) was the name of at least two prominent rishis. One of the rishis was the progenitor of the Sandilya gotra. The name was derived from the Sanskrit words śaṇ, full and dilam, the moon, with the derivative ya added, meaning the one of the full moon, thereby implying a priest or a descendant of the Moon God. Progenitor of Sandilya Gotra :----One rishi was a son of the sage Vashistha and grandson(dauther's son) of the rishi Kashyapa, and the founder of the Śāṇḍilya gotra. Brihadaranyaka Upanishad states that he was a disciple of Vaatsya rishi. His other Acharyas include Kaushika, Gautama Maharishi, Kaishorya Kaapya, Vatsya Vaijavap, and Kushri. His disciples include Kaudinya, Agnivesa, Vatsya Vamakakshayan, Vaishthapureya, and Bharadwaj. He was also the composer of the Śāṇḍilya Upanishad.[3] According to the Bhagavata Purana, he was instrumental in settling certain metaphysical doubts of King Parikshit of Hastinapura and King Vajra of Dwaraka. Rishi from Shāradāvanam: ---Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town.Acording to Sanatan Sanskriti/Culture all the TRIPATHI/TIWARI/TRIPAD comes under Shandilya and All the Shukla's Comes under Garg Gotra. But others may have these gotra even Brahmins and in other castes too. Origin of all the Seven Brahmarshi i.e. the Saptarshi(Gautam, Vashishth, Kashyap, Bharadwaj/Angarisa, Jamadagni/Bhrigu, Krishnatrey:Durvash/Atri, Vishvamitra/Kaushik)/ is Prayagral/Allahaaabad.

एक बार पुनः कश्यप कुल की कन्या का वशिष्ठ से विवाह होता है और शाण्डिय का कश्मीर (modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India) में जन्म होता है। अतः शांडिल्य कश्यप और वशिष्ठ युग्म की उत्पत्ति हुए और सप्तर्षि के व्युत्पन हुए। One rishi was a son of the Sage/Rishi Vashistha and grandson(dauther's son) of the Sage/RishiKashyapa| Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town| Rishi/Sage Kashyapa is Originator of Kashmir| जो मामा को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से छोटे और जो भांजे को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से बड़े( कश्यप ऋषि ही दशरथ और वशुदेव के रूप में अवतार लिए थे विष्णु के आह्वान पर उनका पिता बनने के लिए अतः कुछ लोग भ्रान्ति फैलाते हैं की दशरथ के बहन का विवाह वशिष्ठ से हुआ था)। ------गर्ग स्वयं भारद्वाज की शिष्य परम्परा के पुत्र हुए थे और भारद्वाज स्वयं बाल्मीकि के शिष्य और यही बाल्मीकि कश्यप के पुत्र वरुणदेव के पुत्र थे जो वन गमन किये थे किंचित कारणों से अतः गर्ग ऋषि भी कश्यप से सम्बंधित है और कश्यप कुल की शिष्य परम्परा में आते हैं। ---------अतः गर्ग, गौतम और शांडिल्य की श्रेणी होते हुए भी गौतम सप्तर्षि में आते हैं न की गर्ग और शांडिल्य की तरह व्युत्पन है और इस प्रकार कश्यप से श्रेष्ठ और पूज्य क्रमशः गौतम और वशिष्ठ ही हुए और इस प्रकार अन्य चार सप्तर्षियों या सनातन गोत्रियों के लिए तथा व्युत्पन गोत्रियों के लिए भी गौतम और वशिष्ठ श्रेष्ठ हुए लेकिन उनके लिए गर्ग, गौतम और शांडिल्य का क्रम विशेष माने रखता है शूर्यवंश/इक्शाकुवंश/रघुवंश/रामकुल में रावण जैसे ब्राह्मणकुल का नाश काने के उपरांत उनके अश्वमेध यज्ञ में शामिल होने और खान-पान करने के कारन।
Sandilya (Rishi): Śāṇḍilya (Sanskrit: शाण्डिल्य) was the name of at least two prominent rishis. One of the rishis was the progenitor of the Sandilya gotra.
The name was derived from the Sanskrit words śaṇ, full and dilam, the moon, with the derivative ya added, meaning the one of the full moon, thereby implying a priest or a descendant of the Moon God.
Progenitor of Sandilya Gotra :----One rishi was a son of the sage Vashistha and grandson(dauther's son) of the rishi Kashyapa, and the founder of the Śāṇḍilya gotra. Brihadaranyaka Upanishad states that he was a disciple of Vaatsya rishi. His other Acharyas include Kaushika, Gautama Maharishi, Kaishorya Kaapya, Vatsya Vaijavap, and Kushri. His disciples include Kaudinya, Agnivesa, Vatsya Vamakakshayan, Vaishthapureya, and Bharadwaj. He was also the composer of the Śāṇḍilya Upanishad.[3] According to the Bhagavata Purana, he was instrumental in settling certain metaphysical doubts of King Parikshit of Hastinapura and King Vajra of Dwaraka.
Rishi from Shāradāvanam: ---Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town.Acording to Sanatan Sanskriti/Culture all the TRIPATHI/TIWARI/TRIPAD comes under Shandilya and All the Shukla's Comes under Garg Gotra. But others may have these gotra even Brahmins and in other castes too. O

Repeated Many Times and most Note Worthy : मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।



Repeated Many Times and most Note Worthy : मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

Wednesday, January 21, 2015

मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप पूँजीवाद, समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया कि नहीं अभी?----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ। ----------किसी घटना के घटित होने पर कौन पहुंचा और क्या हुआ इसे देखने और इस पर ऊर्जा व्यर्थ करने के बजाय ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं और उनको प्रोन्नत करने वाले और करने वाले कौन हैं उनको दंड देना उचित है/था न कि कौन पहुंचा और क्या हुआ और जो उबाल हुआ उसका कौन जिम्मेदार है उसको दंड और उसका पोस्ट-मार्टम किया जाय यह उचित। अगर बाद में कुछ हुआ तो उसे तात्कालिक रूप से संभालने और तात्कालिक सजा देने की प्रक्रिया होनी चाहिए न की परोक्ष प्रतिक्रिया। ----------मुझसे पूँछिये की क्या वजह थी जिसकी भर्त्सना मै कई बार कर चुका था घटना से पहले पर बहुमत उस समय उधर था जो ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यतित्व स्वयं रखते है और ऐसे व्यक्तित के विकास में मदद करते हैं। -------मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया नहीं अभी।----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ।

मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप पूँजीवाद, समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया कि नहीं अभी?----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ। ----------किसी घटना के घटित होने पर कौन पहुंचा और क्या हुआ इसे देखने और इस पर ऊर्जा व्यर्थ करने के बजाय ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं और उनको प्रोन्नत करने वाले और करने वाले कौन हैं उनको दंड देना उचित है/था न कि कौन पहुंचा और क्या हुआ और जो उबाल हुआ उसका कौन जिम्मेदार है उसको दंड और उसका पोस्ट-मार्टम किया जाय यह उचित। अगर बाद में कुछ हुआ तो उसे तात्कालिक रूप से संभालने और तात्कालिक सजा देने की प्रक्रिया होनी चाहिए न की परोक्ष प्रतिक्रिया। ----------मुझसे पूँछिये की क्या वजह थी जिसकी भर्त्सना मै कई बार कर चुका था घटना से पहले पर बहुमत उस समय उधर था जो ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यतित्व स्वयं रखते है और ऐसे व्यक्तित के विकास में मदद करते हैं। -------मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया नहीं अभी।----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ।

Tuesday, January 20, 2015

The people of the present time judging whom-------the existence of even lord Shiv/ Shiva in broader way the existance of Universe was/is dependent on whose Tolerance i.e. the Vivek:Trilochan:Trayambak:Trinetra i.e one of the son of Saraswati i.e. elder brother of Gyan and Vidya|



The people of the present time judging whom-------the existence of even lord Shiv/ Shiva in broader way the existance of Universe was/is dependent on whose Tolerance i.e. the Vivek:Trilochan:Trayambak:Trinetra i.e one of the son of Saraswati i.e. elder brother of Gyan and Vidya|