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Friday, February 24, 2017

पता चल गया न की केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर) में और कैलाशनाथ जिनका सीधा सीधा एकनाम मात्र है गिरीश में कौन ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है की अभी भी नहीं समझ में आया या अब भी मेरी कुंडली खोजोगे मेरे घर से लेकर दुनिया के कोने कोने या फिर दुनिया भर की मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में? >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।

पता चल गया न की केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर) में और कैलाशनाथ जिनका सीधा सीधा एकनाम मात्र है गिरीश में कौन ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है की अभी भी नहीं समझ में आया या अब भी मेरी कुंडली खोजोगे मेरे घर से लेकर दुनिया के कोने कोने या फिर दुनिया भर की मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में? >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

गुरुदेव जोशी आप मुझ पूर्णातिपूर्ण मतलब जो "सत्यम शिवम् सुंदरम" और "सत्यमेव जयते" दोनों हो उससे सदा सदा ही समाज को अपने कृत्य से सदा अपूर्ण करने का प्रयास करने वाले रावन-मेघनाद कुल का समर्थन करवा रहे थे तो वह आप की कौन सी गुरुता थी जब मैं स्वयं आप समेत सम्पूर्ण संसार का का भी अवलंबन था? लक्ष्य तो पूर्ण करवा दिया गया पर उस रावन-मेघनाद कुल विशेष की भौतिकता और आप का अनवरत प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन उसकी स्वयं आप के लिए और आप के सुभेक्षुओं के लिए भी हानिकारक है।

गुरुदेव जोशी आप मुझ पूर्णातिपूर्ण मतलब जो "सत्यम शिवम् सुंदरम" और "सत्यमेव जयते" दोनों हो उससे सदा सदा ही समाज को अपने कृत्य से सदा अपूर्ण करने का प्रयास करने वाले रावन-मेघनाद कुल का समर्थन करवा रहे थे तो वह आप की कौन सी गुरुता थी जब मैं स्वयं आप समेत सम्पूर्ण संसार का का भी अवलंबन था? लक्ष्य तो पूर्ण करवा दिया गया पर उस रावन-मेघनाद कुल विशेष की भौतिकता और आप का अनवरत प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन उसकी स्वयं आप के लिए और आप के सुभेक्षुओं के लिए भी हानिकारक है। >>>>>>>>>>>>तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

इस प्रयागराज में दलित से लेकर कुर्मी (कूर्मावतारी) तक और इस्लामनुयायी से लेकर हिन्दू तक सब ईसाइयत (कृत्य और मतावलंबन) के चक्र से निजात नहीं पा रहे थे और एक दूसरे पर आज तक आरोप मढ़े जा रहे थे और दक्षिण भारत पूर्वोत्तर से भी गयी गुज़री दशा हो गयी थी पर हिन्दू जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने से कुछ बाहर बाहर अभी दिखाई नहीं पड़ रहा था और यहां तक की मेरी कुंडली निकलने की चेतावनी भ्रमित हिन्दू रक्षक समूह देने लगा तो सत्य बताना जरूरी हो गया था की पूरी दुनिया ईसाइयत के ग्रहण से ग्रषित हो चुकी है और अब इससे स्वयं ईसाइयत और इस्लामियत को खतरा है क्योंकि हिन्दू समाज का तथाकथित रक्षक समूह मतिभ्रम वस् काले और गोरे के गोरखधंधे पर उतर आया है और सुदूर दक्षिण से प्रेरित हो सबका एक ही उपाय बता रहा है गधे और घोड़े से खच्चर बन जाएगा मतलब काले और गोरे का गोरखधंधा उनका पूर्ण सफल हो जाएगा तो हिन्दू समाज सर्वशक्तिमान हो जाएगा पर मेरे विचार से यह अपरिहार्य मामलों से हो जाय तो हो जाय पर अति हुए तो ईसाइयत में ही बदल जाएगा फिर मानवता का संघार ही एक रास्ता ही मानवता की रक्षा का विकल्प पुनः होगा जिससे इसे विगत 15 वर्ष पूर्व किशी तरह से बचा जा सका है? भाँग का नशा उतर सकता है पर काले और गोरे के गोरखधंधे का नशा अंत करके हे दम लेता है।

इस प्रयागराज में दलित से लेकर कुर्मी (कूर्मावतारी) तक और इस्लामनुयायी से लेकर हिन्दू तक सब ईसाइयत (कृत्य और मतावलंबन) के चक्र से निजात नहीं पा रहे थे और एक दूसरे पर आज तक आरोप मढ़े जा रहे थे और दक्षिण भारत पूर्वोत्तर से भी गयी गुज़री दशा हो गयी थी पर हिन्दू जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने से कुछ बाहर बाहर अभी दिखाई नहीं पड़ रहा था और यहां तक की मेरी कुंडली निकलने की चेतावनी भ्रमित हिन्दू रक्षक समूह देने लगा तो सत्य बताना जरूरी हो गया था की पूरी दुनिया ईसाइयत के ग्रहण से ग्रषित हो चुकी है और अब इससे स्वयं ईसाइयत और इस्लामियत को खतरा है क्योंकि हिन्दू समाज का तथाकथित रक्षक समूह मतिभ्रम वस् काले और गोरे के गोरखधंधे पर उतर आया है और सुदूर दक्षिण से प्रेरित हो सबका एक ही उपाय बता रहा है गधे और घोड़े से खच्चर बन जाएगा मतलब काले और गोरे का गोरखधंधा उनका पूर्ण सफल हो जाएगा तो हिन्दू समाज सर्वशक्तिमान हो जाएगा पर मेरे विचार से यह अपरिहार्य मामलों से हो जाय तो हो जाय पर अति हुए तो ईसाइयत में ही बदल जाएगा फिर मानवता का संघार ही एक रास्ता ही मानवता की रक्षा का विकल्प पुनः होगा जिससे इसे विगत 15 वर्ष पूर्व किशी तरह से बचा जा सका है? भाँग का नशा उतर सकता है पर काले और गोरे के गोरखधंधे का नशा अंत करके हे दम लेता है। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।

तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।https://vandemataramvivekanandd

मेरा स्पष्ट मानना है की मेरे घर में मन से कलुषित और तन से कलुषित लोगों को नहीं आना है किशी भी युग में और दूसरा मैं अपना घर स्वयं अपने साथ लिए फिरता हूँ और भी स्वयं मेरे माता और पिता की संतति कलंकित और कलुषित हो ही नहीं सकती और हुई तो समाज को चलाने वाले जाने और समाज के चलाने वालों के दबाव में कार्य करने वाले वैदकी समाज जाने।

मेरा स्पष्ट मानना है की मेरे घर में मन से कलुषित और तन से कलुषित लोगों को नहीं आना है किशी भी युग में और दूसरा मैं अपना घर स्वयं अपने साथ लिए फिरता हूँ और भी स्वयं मेरे माता और पिता की संतति कलंकित और कलुषित हो ही नहीं सकती और हुई तो समाज को चलाने वाले जाने और समाज के चलाने वालों के दबाव में कार्य करने वाले वैदकी समाज जाने। >>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैं तो स्वयं घोषित कर चुका हूँ की वैश्विक युग मतलब विश्वएकगांव जैसे तकनीति सम्पन्न युग में तथाकथित सामाजिक न्याय एक बेईमानी है मेरे जैसे लोगों के साथ और इस सम्बन्ध में आप लोग कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि की इससे स्थानीय से लेकर अंतरास्ट्रीय नीतिकार, प्रशासक, शासक व् मानवीय संशाधन की कमी जूझ रहे देशों का अत्यंत ही लाभकारी हित है इसे जारी रहने में या आनुवांशिक संतति को दूसरों से पलवाने में बहुत से लोगों को आसानी होती चली आ रही है तो फिर जब किशी का तेज नहीं संभालेगा तो उसकी कुंडली खोजेंगे तो मैं अपनी कुंडली इसी के साथ ही बताये चल रहा हूँ और आप को जो पता हो बताइयेगा। >

मैं तो स्वयं घोषित कर चुका हूँ की वैश्विक युग मतलब विश्वएकगांव जैसे तकनीति सम्पन्न युग में तथाकथित सामाजिक न्याय एक बेईमानी है मेरे जैसे लोगों के साथ और इस सम्बन्ध में आप लोग कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि की इससे स्थानीय से लेकर अंतरास्ट्रीय नीतिकार, प्रशासक, शासक व् मानवीय संशाधन की कमी जूझ रहे देशों का अत्यंत ही लाभकारी हित है इसे जारी रहने में या आनुवांशिक संतति को दूसरों से पलवाने में बहुत से लोगों को आसानी होती चली आ रही है तो फिर जब किशी का तेज नहीं संभालेगा तो उसकी कुंडली खोजेंगे तो मैं अपनी कुंडली इसी के साथ ही बताये चल रहा हूँ और आप को जो पता हो बताइयेगा। >>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

इस संसार के कुछ ऐसे सिध्दहस्त प्रशासक, शासक, नीतिकार और हर मानव जीवन के सभी क्षेत्र के स्वयं को स्वयंभू विशेसज्ञ मानने वाले और उनकी टीम इस संसार घूम रही है जो सबकी कुंडली खोजते है फिर अपना उल्लू शीधा करते हैं और कहते हैं की मैंने उस अमुक व्यक्ति नियंत्रित करके संसार का बहुत बड़ा अमोघास्त्र चला लिया जो ब्रह्मअस्त्र को भी मात दे देता है तो मैं अपनी कुंडली लिए हुए फिरता हूँ मुझे नियंत्रीत किया जाय और मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सामने लाया जाय या मेरी कुंडली जो उनको ज्ञात हो उसे सामने लाया जाय? हर पुरुष विदूषक की तरह प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए कम से कम इतना तो समझ लीजिये अगर लोक मर्यादा का ज़रा सा भान हो और हर किशी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ आप नहीं ला सकते है इस संसार में और न सबकी कुंडली जानकार उसको आप नीचा दिखा सकते हैं जो आम मानव जीवन को पटरी पर लाने हेतु संकल्पित हो उसकी कदम कदम पर कुंडली नहीं खोजते हैं और न उसका जयेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तैयार करने की जुगाड़ में रहते हैं कदम कदम पर उसके जीवन लीला के अभिनय को अपमानित करने हेतु ?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक

इस संसार के कुछ ऐसे सिध्दहस्त प्रशासक, शासक, नीतिकार और हर मानव जीवन के सभी क्षेत्र के स्वयं को स्वयंभू विशेसज्ञ मानने वाले और उनकी टीम इस संसार घूम रही है जो सबकी कुंडली खोजते है फिर अपना उल्लू शीधा करते हैं और कहते हैं की मैंने उस अमुक व्यक्ति नियंत्रित करके संसार का बहुत बड़ा अमोघास्त्र चला लिया जो ब्रह्मअस्त्र को भी मात दे देता है तो मैं अपनी कुंडली लिए हुए फिरता हूँ मुझे नियंत्रीत किया जाय और मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सामने लाया जाय या मेरी कुंडली जो उनको ज्ञात हो उसे सामने लाया जाय? हर पुरुष विदूषक की तरह प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए कम से कम इतना तो समझ लीजिये अगर लोक मर्यादा का ज़रा सा भान हो और हर किशी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ आप नहीं ला सकते है इस संसार में और न सबकी कुंडली जानकार उसको आप नीचा दिखा सकते हैं जो आम मानव जीवन को पटरी पर लाने हेतु संकल्पित हो उसकी कदम कदम पर कुंडली नहीं खोजते हैं और न उसका जयेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तैयार करने की जुगाड़ में रहते हैं कदम कदम पर उसके जीवन लीला के अभिनय को अपमानित करने हेतु ?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।