Google+ Followers

Friday, March 24, 2017

जिसकी परिक्षा होनी हो सो हो पर मैं सार्वजनिक तौर पर कह चुका हूँ और आज भी कहता हूँ की कि मेरे सन्दर्भ में काशीराम, नारायणन, अम्बेडकर, जार्ज, कलाम, अटल और अब जोशी तक को भी दाँव पर लगा दिया गया तो एक एक कर सम्पूर्ण भारत या सम्पूर्ण संसार को पुनः दाँव पर लगा दिया जाय तो भी एकल स्वरुप में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नही मिलने वाला है इस संसार को अगर मिलेगा भी तो उसी बिशुनपुर-जौनपुर-223103 के उसी रामानन्द कुल की मूल भूमि के वासी से जो मेरा गुरुकुल है और वह गाँव मेरा गुरुग्राम अन्यथा मिलेगा ही नहीं किशी भी स्थिति में। >>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

जिसकी परिक्षा होनी हो सो हो पर मैं सार्वजनिक तौर पर कह चुका हूँ और आज भी कहता हूँ की कि मेरे सन्दर्भ में काशीराम, नारायणन, अम्बेडकर, जार्ज, कलाम, अटल और अब जोशी तक को भी दाँव पर लगा दिया गया तो एक एक कर सम्पूर्ण भारत या सम्पूर्ण संसार को पुनः दाँव पर लगा दिया जाय तो भी एकल स्वरुप में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नही मिलने वाला है इस संसार को अगर मिलेगा भी तो उसी बिशुनपुर-जौनपुर-223103 के उसी रामानन्द कुल की मूल भूमि के वासी से जो मेरा गुरुकुल है और वह गाँव मेरा गुरुग्राम अन्यथा मिलेगा ही नहीं किशी भी स्थिति में। >>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

तेरा मन दर्पण कहलाये: क्या पूर्णाति पूर्ण हेतु पूर्णाति पूर्ण जीवन देने की योग्यता और सहनशक्ति इस मानव समाज में थी? और उससे व्यवहारिक जीवन जीने की बात भी हुई तो क्या आदर्श व्यवहारिक जीवन आप लोगों ने उसे दिया है? तो फिर आप आदर्श और मर्यादित जीवन उससे चाहते हैं तो वह देता चला आ रहा है आप की ऐसी परिश्थितियों में भी जब आप अपने को व्यवहारिकता के साथ नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं तो अब आप अपने जीवन के कर्तव्यों को आइना बना देखिये की आप अपने जीवन के साथ कैसा न्याय चाहते है?>>>>>>>किशी से शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) होने के लिए चुनौती दीजिये और फिर वह चुनौती स्वीकार ऐसी अवस्था में आ जाय तो फिर वह उस अवस्था में जाकर अपना कार्य पूर्ण करले तो फिर प्रायोजित तरीके से उसके स्वयं के परिवार(जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक सब के सब लोग जो भवसागर के दल-दल भरे जीवन का अंग हो उसका एकीकार हो जाने की वजह से सम्पूर्ण मानवता पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर उसको आप अपने द्वारा दी गयी परिश्थिति में जीने को बाध्य कीजिये जिस मानवता के लिए उसको आपने उस अवस्था में भेजा था और वह उद्देश्य पूर्ती के साथ पूर्णाति पूर्ण होने की वजह से साबित बच आपके सम्मुख है । क्योंकि जो ऐसी अवश्था में पहुँच चुका है प्रयागराज जैसे स्थान पर ही अपने को केंद्रित कर तो पूरी दुनिया उसके लिए दल-दल समान कीचड़ युक्त ही हो जाती है फिर भी उसे व्यवहारिक जीवन जीने को उसके परमगुरु परमपिता परमेश्वर और परमपिता द्वारा कहा गया है तो वह उस जीवन को भी जी रहा है तो टीका-टिप्पणी ज्यादा न किया जाय। शायद आप सभी जो सशरीर परमब्रह्म बनने में जो परिणामी परिश्थिति बनाती है उसके लिए उसमे आप उस स्थिति अनुसार ही आप अपने स्वार्थ अनुकूल उसके प्रति न्याय के ठीकेदार हो जाते हैं जबकी वास्तविकता ऐसी नहीं है। किशी घटना विशेष के पहले उसकी वास्तविक पृष्ठभूमि का भी वास्तविक अध्ययन जरूरी है। शायद आप भूल रहे हैं की जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) अवस्था में गया हो मतलब सशरीर परमब्रह्म बन चुका हो उसको आदि से अनादि का ज्ञान उसके और उसके जीवन को प्रभावित करने वाली घटनाओ के सन्दर्भ में हो जाता है तो ऐसे में उसके स्वयं के परिवार (जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक के पक्ष और विपक्ष सब किशी न किशी रूप में कटघरे में आते है क्योंकि आप पक्ष और विपक्ष दोनों का अस्तित्व उसके अस्तित्व पर ही टिका हो चुका होता है और उसमे वह परमसत्य हो चुका होता है मतलब आप दोनों रहें या न रहें तब भी उसका सशरीर अस्तित्व सम्भव होता है। अतः आप सब अपनी-अपनी तरफ से उसको कटघरे में न खड़ा कीजिये क्योकि अगर वह मर्यादित आचरण छोड़ मतलब प्रगतिसील सच्चाई का अनुपालन छोड़ नंगे सत्य पर आकर उधेड़-बुन प्रारम्भ किया तो पूरी मानवता जिसमे उसका परिवार (जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक के पक्ष और विपक्ष सब का आचरण दल-दल साबित होगी जिसमे से वह उबर कर सशरीर परमब्रह्म साबित हो चुका है पर आप किशी न किशी रूप में कटघरे में/उसके लपेटे में आएंगे? लेकिन इसका मतलब यह नहीं की संसार में अच्छे और निकृष्ट कर्म करने वाले सब समतुल्य है? आगे भी जो फरवरी, 2003 में इस प्रयागराज में सम्पूर्ण मानवता का बेटा/पुत्र बन सम्पूर्ण मानवता हेतु अपने को परमपिता परमेश्वर और परमगुरु परमपिता परमेश्वर के आदेशतन समर्पित किया वह अगर साबित बचा तो फिर इस सन्सार में उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं हो सकता भवसागर में भ्रमणकर्ता कुछ भी कहें? उसको अपने जीवन से जुडी घटनाये तो क्षणिक आतंरिक अवलोकन से ज्ञात हो जाती है की किश प्रकार वह स्वयं प्रभावित हुआ और किश प्रकार किन लोगों ने उसको प्रभावित किया और केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवम महासागर अध्यन केंद्र, प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज व् प्रयागराज का पूर्ण व्योरा दूंगा तो गुरुजन और गुरुकुल तथा सहयोगीजन की महिमा और गरिमा जाएगी और उसके पूर्व और उत्तरपूर्व तथा आगे की सुनाने से कुछ हांसिल होना था तो वह हो चुका है की मैं एक स्थाई शिक्षणरत प्रयागराज विश्विद्यालय शिक्षक संघ का सदस्य हूँ और इस प्रकार कम से कम 2057 तक कम से कम इस प्रयागराज और संसार में मेरी सत्ता रहेगी और आप लोग अब आगे की व्यवस्था कीजिये और 2057 तक की सत्ता किशी राज सत्ता से प्रभावित होने वाली नहीं है।>>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

तेरा मन दर्पण कहलाये: क्या पूर्णाति पूर्ण हेतु पूर्णाति पूर्ण जीवन देने की योग्यता और सहनशक्ति इस मानव समाज में थी? और उससे व्यवहारिक जीवन जीने की बात भी हुई तो क्या आदर्श व्यवहारिक जीवन आप लोगों ने उसे दिया है? तो फिर आप आदर्श और मर्यादित जीवन उससे चाहते हैं तो वह देता चला आ रहा है आप की ऐसी परिश्थितियों में भी जब आप अपने को व्यवहारिकता के साथ नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं तो अब आप अपने जीवन के कर्तव्यों को आइना बना देखिये की आप अपने जीवन के साथ कैसा न्याय चाहते है?>>>>>>>किशी से शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) होने के लिए चुनौती दीजिये और फिर वह चुनौती स्वीकार ऐसी अवस्था में आ जाय तो फिर वह उस अवस्था में जाकर अपना कार्य पूर्ण करले तो फिर प्रायोजित तरीके से उसके स्वयं के परिवार(जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक सब के सब लोग जो भवसागर के दल-दल भरे जीवन का अंग हो उसका एकीकार हो जाने की वजह से सम्पूर्ण मानवता पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर उसको आप अपने द्वारा दी गयी परिश्थिति में जीने को बाध्य कीजिये जिस मानवता के लिए उसको आपने उस अवस्था में भेजा था और वह उद्देश्य पूर्ती के साथ पूर्णाति पूर्ण होने की वजह से साबित बच आपके सम्मुख है । क्योंकि जो ऐसी अवश्था में पहुँच चुका है प्रयागराज जैसे स्थान पर ही अपने को केंद्रित कर तो पूरी दुनिया उसके लिए दल-दल समान कीचड़ युक्त ही हो जाती है फिर भी उसे व्यवहारिक जीवन जीने को उसके परमगुरु परमपिता परमेश्वर और परमपिता द्वारा कहा गया है तो वह उस जीवन को भी जी रहा है तो टीका-टिप्पणी ज्यादा न किया जाय। शायद आप सभी जो सशरीर परमब्रह्म बनने में जो परिणामी परिश्थिति बनाती है उसके लिए उसमे आप उस स्थिति अनुसार ही आप अपने स्वार्थ अनुकूल उसके प्रति न्याय के ठीकेदार हो जाते हैं जबकी वास्तविकता ऐसी नहीं है। किशी घटना विशेष के पहले उसकी वास्तविक पृष्ठभूमि का भी वास्तविक अध्ययन जरूरी है। शायद आप भूल रहे हैं की जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) अवस्था में गया हो मतलब सशरीर परमब्रह्म बन चुका हो उसको आदि से अनादि का ज्ञान उसके और उसके जीवन को प्रभावित करने वाली घटनाओ के सन्दर्भ में हो जाता है तो ऐसे में उसके स्वयं के परिवार (जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक के पक्ष और विपक्ष सब किशी न किशी रूप में कटघरे में आते है क्योंकि आप पक्ष और विपक्ष दोनों का अस्तित्व उसके अस्तित्व पर ही टिका हो चुका होता है और उसमे वह परमसत्य हो चुका होता है मतलब आप दोनों रहें या न रहें तब भी उसका सशरीर अस्तित्व सम्भव होता है। अतः आप सब अपनी-अपनी तरफ से उसको कटघरे में न खड़ा कीजिये क्योकि अगर वह मर्यादित आचरण छोड़ मतलब प्रगतिसील सच्चाई का अनुपालन छोड़ नंगे सत्य पर आकर उधेड़-बुन प्रारम्भ किया तो पूरी मानवता जिसमे उसका परिवार (जिसमे आप का भी पारिवारिक अंग सामिल हैं), घर और सगे-सम्बन्धियों से लेकर अंतराष्ट्रीय स्तर तक के पक्ष और विपक्ष सब का आचरण दल-दल साबित होगी जिसमे से वह उबर कर सशरीर परमब्रह्म साबित हो चुका है पर आप किशी न किशी रूप में कटघरे में/उसके लपेटे में आएंगे? लेकिन इसका मतलब यह नहीं की संसार में अच्छे और निकृष्ट कर्म करने वाले सब समतुल्य है? आगे भी जो फरवरी, 2003 में इस प्रयागराज में सम्पूर्ण मानवता का बेटा/पुत्र बन सम्पूर्ण मानवता हेतु अपने को परमपिता परमेश्वर और परमगुरु परमपिता परमेश्वर के आदेशतन समर्पित किया वह अगर साबित बचा तो फिर इस सन्सार में उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं हो सकता भवसागर में भ्रमणकर्ता कुछ भी कहें? उसको अपने जीवन से जुडी घटनाये तो क्षणिक आतंरिक अवलोकन से ज्ञात हो जाती है की किश प्रकार वह स्वयं प्रभावित हुआ और किश प्रकार किन लोगों ने उसको प्रभावित किया और केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवम महासागर अध्यन केंद्र, प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज व् प्रयागराज का पूर्ण व्योरा दूंगा तो गुरुजन और गुरुकुल तथा सहयोगीजन की महिमा और गरिमा जाएगी और उसके पूर्व और उत्तरपूर्व तथा आगे की सुनाने से कुछ हांसिल होना था तो वह हो चुका है की मैं एक स्थाई शिक्षणरत प्रयागराज विश्विद्यालय शिक्षक संघ का सदस्य हूँ और इस प्रकार कम से कम 2057 तक कम से कम इस प्रयागराज और संसार में मेरी सत्ता रहेगी और आप लोग अब आगे की व्यवस्था कीजिये और 2057 तक की सत्ता किशी राज सत्ता से प्रभावित होने वाली नहीं है।>>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, March 23, 2017

चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी और उमाशंकर तथा ज्ञानेंद्र जी ! यह रामनाथ(शिव) और रमानाथ(विष्णु) का प्रसंग है कुछ ज्यादा ही पेंचीदा है:(रामः यस्य ईश्वरः सह। रामस्य ईश्वरः सह। तस्य रामेश्वर(महादेव शिव)) फिर भी उसकी सीमा पार हो बात सशरीर परमब्रह्म राम की आ गयी मतलब रावणकुल को मोक्ष देने के बाद राम के पूर्ण सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश की एकल अवस्था) अवस्था प्राप्ति हो चुकी थी और यह प्रसङ्ग तो रामेश्वरम /रामनाथपुरम में रावणकुल को मोक्ष देने के पहले की अवश्था है।>>>>>>> सज्जन ह्रदय में प्रभु का वास होता है| जहाँ क्षमा है वहा धर्म का वास होता है तथा जहा दया है उस स्थान पर स्वयं परमात्मा का निवास होता है। >>>>>>>>>>>>बिशुनपुर-जौनपुर-223103 में वैसे तो बहुत से सज्जन थे पर दो सज्जन है/थे जिनका मैं नाम लेता हूँ: एक है मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर/परमात्मा, श्रीधर:विष्णु(सार्वत्रिक तौर पर धार्मिक/आध्यात्मिक/सांसारिक/आमजनमानस अन्तर्गत व्यक्तित्व) और दूसरे थे परमात्मा मामा(स्थानीय अतीव भोले भाले व्यक्ति) तो दोनों में से एक की जो सारभौमिक छाया और दूसरे की आनुवंशिक छाया हो लिया हो उसके लिए मुझे हर स्थिति में नियंत्रित ही रहना था पर वह एकल स्वरुप में मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न ही सही? जो गुरु की छाया लिया हो वह शुक्राचारी या अन्य कोई चारी हो उसका प्रतिकार कैसे कर सकते हैं हम तो वह अपने किये का प्रायश्चित स्वयं करेगा आज नहीं तो कल।>>>>>>>सज्जन ह्रदय में प्रभु का वास होता है| जहाँ क्षमा है वहा धर्म का वास होता है तथा जहा दया है उस स्थान पर स्वयं परमात्मा का निवास होता है>>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी और उमाशंकर तथा ज्ञानेंद्र जी ! यह रामनाथ(शिव) और रमानाथ(विष्णु) का प्रसंग है कुछ ज्यादा ही पेंचीदा है:(रामः यस्य ईश्वरः सह। रामस्य ईश्वरः सह। तस्य रामेश्वर(महादेव शिव)) फिर भी उसकी सीमा पार हो बात सशरीर परमब्रह्म राम की आ गयी मतलब रावणकुल को मोक्ष देने के बाद राम के पूर्ण सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश की एकल अवस्था) अवस्था प्राप्ति हो चुकी थी और यह प्रसङ्ग तो रामेश्वरम /रामनाथपुरम में रावणकुल को मोक्ष देने के पहले की अवश्था है।>>>>>>> सज्जन ह्रदय में प्रभु का वास होता है| जहाँ क्षमा है वहा धर्म का वास होता है तथा जहा दया है उस स्थान पर स्वयं परमात्मा का निवास होता है। >>>>>>>>>>>>बिशुनपुर-जौनपुर-223103 में वैसे तो बहुत से सज्जन थे पर दो सज्जन है/थे जिनका मैं नाम लेता हूँ: एक है मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर/परमात्मा, श्रीधर:विष्णु(सार्वत्रिक तौर पर धार्मिक/आध्यात्मिक/सांसारिक/आमजनमानस अन्तर्गत व्यक्तित्व) और दूसरे थे परमात्मा मामा(स्थानीय अतीव भोले भाले व्यक्ति) तो दोनों में से एक की जो सारभौमिक छाया और दूसरे की आनुवंशिक छाया हो लिया हो उसके लिए मुझे हर स्थिति में नियंत्रित ही रहना था पर वह एकल स्वरुप में मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न ही सही? जो गुरु की छाया लिया हो वह शुक्राचारी या अन्य कोई चारी हो उसका प्रतिकार कैसे कर सकते हैं हम तो वह अपने किये का प्रायश्चित स्वयं करेगा आज नहीं तो कल।>>>>>>>सज्जन ह्रदय में प्रभु का वास होता है| जहाँ क्षमा है वहा धर्म का वास होता है तथा जहा दया है उस स्थान पर स्वयं परमात्मा का निवास होता है>>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

प्रयागराज वाले या तो मुझे पहचानते नहीं थे न पहचान रहे हैं पर यदि पहचान रहे थे या पहचान रहे हैं तो जिस हेतु संकल्पित था उस कार्य को आसानी से होने दिए होते और जो अमान्य था उसका ही विरोध या विकल्प सुझाये होते पर मुझे लगता है की जिसकी सत्ता कम से कम 2057 तक अवश्य ही चलनी है उसको पूर्णतः अभी तक नहीं पहचान रहे है वे केवल राजसत्ता की ही सोच रखते है जो अल्पकाल में ही परिवर्तनशील होती है। >>>>>>>>इस प्रयागराज और दुनिया वालों ने मेरी अवकात तय कर दी थी/है पर अभी तक मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तीनो एकल स्वरुप में ला नहीं सके हैं तो अंधे के हाँथ मोती लगाने वाला न्याय जब दूसरे के साथ करने में उत्सुकता दिखाएँगे तो आप और आप की आने वाली पीढी के साथ जो हो रहा है वही ही होगा?

प्रयागराज वाले या तो मुझे पहचानते नहीं थे न पहचान रहे हैं पर यदि पहचान रहे थे या पहचान रहे हैं तो जिस हेतु संकल्पित था उस कार्य को आसानी से होने दिए होते और जो अमान्य था उसका ही विरोध या विकल्प सुझाये होते पर मुझे लगता है की जिसकी सत्ता कम से कम 2057 तक अवश्य ही चलनी है उसको पूर्णतः अभी तक नहीं पहचान रहे है वे केवल राजसत्ता की ही सोच रखते है जो अल्पकाल में ही परिवर्तनशील होती है। >>>>>>>>इस प्रयागराज और दुनिया वालों ने मेरी अवकात तय कर दी थी/है पर अभी तक मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तीनो एकल स्वरुप में ला नहीं सके हैं तो अंधे के हाँथ मोती लगाने वाला न्याय जब दूसरे के साथ करने में उत्सुकता दिखाएँगे तो आप और आप की आने वाली पीढी के साथ जो हो रहा है वही ही होगा?>>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

प्रायोजित कोई व्यक्तित्व दो-चार-दस वर्ष के लिए ही हो सकता है पर स्वाभाविक/मौलिक जीवन ही वास्तविक जीवन होता है और प्रयागराज-काशी-अयोध्या-मथुरा की संस्कृति से ओत-प्रोत भारत/अखण्ड भारत के हर कोने के अधिकांशतः सज्जन स्त्री-पुरुष जो मौलिक संस्कारित और सुसंस्कृत जीवन जीते है जो मानवता के मूल और धुरी कहे जाते है उन सभी को प्रायोजित जीवन कैसे दिया जा सकता है मतलब इन सज्जन स्त्री और पुरुष को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में यदि कोई कारगर वैश्विक योजना बनाई जाएगी तभी सर्वसम्मति से सफल हो सकती है अन्यथा केवल प्रायोजित व्यवश्था ही सारभौमिक रूप से पूर्णतः सफल होगी इसकी कोई स्वाभाविक स्वीकारोक्ति नहीं पर हाँ व्यवश्था क्रम से ही बदली जा सकती है जबकी एकल रूप में व्यक्ति का जीवन एक क्षण और कुछ दिनों और महीनों मात्र में कुछ सन्दर्भ में ही बदल जाता है? >>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक//त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

प्रायोजित कोई व्यक्तित्व दो-चार-दस वर्ष के लिए ही हो सकता है पर स्वाभाविक/मौलिक जीवन ही वास्तविक जीवन होता है और प्रयागराज-काशी-अयोध्या-मथुरा की संस्कृति से ओत-प्रोत भारत/अखण्ड भारत के हर कोने के अधिकांशतः सज्जन स्त्री-पुरुष जो मौलिक संस्कारित और सुसंस्कृत जीवन जीते है जो मानवता के मूल और धुरी कहे जाते है उन सभी को प्रायोजित जीवन कैसे दिया जा सकता है मतलब इन सज्जन स्त्री और पुरुष को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में यदि कोई कारगर वैश्विक योजना बनाई जाएगी तभी सर्वसम्मति से सफल हो सकती है अन्यथा केवल प्रायोजित व्यवश्था ही सारभौमिक रूप से पूर्णतः सफल होगी इसकी कोई स्वाभाविक स्वीकारोक्ति नहीं पर हाँ व्यवश्था क्रम से ही बदली जा सकती है जबकी एकल रूप में व्यक्ति का जीवन एक क्षण और कुछ दिनों और महीनों मात्र में कुछ सन्दर्भ में ही बदल जाता है? >>>>>>>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रयम्बक//त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

अगर इस्लाम (जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा। >>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

अगर इस्लाम (जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा। >>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

विशेष बात यह की रामानन्द कुल/व्यासी-गौतम गोत्रीय मिश्र सनातन ब्राह्मण कुल/बिशुनपुर-जौनपुर-223203 के कुलदेवता, महादेव शिव हैं और सारंगधर कुल/कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय सनातन ब्राह्मण कुल/रामापुर-आजमगढ़-223225 की कुलदेवी देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) हैं तो ये दोनों कुल और इस प्रकार दोनों गाँव एक दूसरे के अन्योन्य आश्रित है इसमें कोई प्रमाण की जरूरत नहीं है। तो ऐसे में अगर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) को प्रयागराज में रावनकुल को नामित कोई संस्थान/केंद्र/निर्माण स्वीकार नहीं है तो आप और आप के समर्थक कोई भी ऐसा सदैव असफल ही होने वाला प्रयास बराबर मत कीजिये अन्यथा आप जाने, आप के आश्रित और आप के छद्म श्रद्धा-भक्ति करने वाले स्वार्थी शिष्य जाने। >>>>>>>>>प्रयागराज में मौजूद हर जाति/सम्प्रदाय के अपने मामाजी और नानाजी व् भाई-बहनो विशेषकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनके अनुसांगिक/व्युत्पन्न जाति/सम्प्रदाय और विशेषकर रजस्व ब्राह्मण/कायस्थ और कूर्मावतारी समुदाय के माध्यम से श्रद्धेय गुरुदेव जी को सूचित करना चाहता हूँ की रामानन्द कुल और सारंगधर कुल ने ही इस संसार के विश्वजनमानस को सनातन हिन्दू संस्कृति ही मौलिक मानवीय संस्कृति है जिसका उद्गम स्थल/केंद्र प्रयागराज ही है की सिद्धि में जो भूमिका निभाई है उसको जितना ही पुनर्स्थापित/प्रतिस्थापित किया जाय उसका उतना ही प्रतिफल इस संसार को आने वाले युगों में इन दोनों कुलो से मिलता ही रहेगा जिसने की मेरी कुलदेवी, देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) के द्वारा स्वप्न में मेरे लिए अशुभ जाने के निर्देश के बावजूद अपने अतिसय प्रिय पुत्र/मानस पुत्र/शिष्य को 7 फरवरी, 2003 को आप के मानवता के संरक्षण/पुनर्जन्म, संपोषण, संवर्धन/उत्थान व् सतत संचलन हेतु इस प्रयागराज में संकल्पित किया और वह मानवता को समर्पित यज्ञ क्रमसः 29 मई , 2006; 11/18 सितंबर, 2007; 29 अक्टूबर, 2009 और 19 जुलाई, 2011 को क्रमिक रूप से सफल होते हुए 25 नवम्बर, 2016 को पूर्ण सफल हो गया।>>>>>>>>>> विशेष बात यह की रामानन्द कुल/व्यासी-गौतम गोत्रीय मिश्र सनातन ब्राह्मण कुल/बिशुनपुर-जौनपुर-223203 के कुलदेवता, महादेव शिव हैं और सारंगधर कुल/कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय सनातन ब्राह्मण कुल/रामापुर-आजमगढ़-223225 की कुलदेवी देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) हैं तो ये दोनों कुल और इस प्रकार दोनों गाँव एक दूसरे के अन्योन्य आश्रित है इसमें कोई प्रमाण की जरूरत नहीं है। तो ऐसे में अगर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) को रावनकुल को नामित कोई संस्थान/केंद्र/निर्माण स्वीकार नहीं है तो आप और आप के समर्थक कोई भी ऐसा सदैव असफल ही होने वाला प्रयास बराबर मत कीजिये अन्यथा आप जाने, आप के आश्रित और आप के छद्म श्रद्धा-भक्ति करने वाले स्वार्थी शिष्य जाने। >>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

विशेष बात यह की रामानन्द कुल/व्यासी-गौतम गोत्रीय मिश्र सनातन ब्राह्मण कुल/बिशुनपुर-जौनपुर-223203 के कुलदेवता, महादेव शिव हैं और सारंगधर कुल/कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय सनातन ब्राह्मण कुल/रामापुर-आजमगढ़-223225 की कुलदेवी देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) हैं तो ये दोनों कुल और इस प्रकार दोनों गाँव एक दूसरे के अन्योन्य आश्रित है इसमें कोई प्रमाण की जरूरत नहीं है। तो ऐसे में अगर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) को प्रयागराज में रावनकुल को नामित कोई संस्थान/केंद्र/निर्माण स्वीकार नहीं है तो आप और आप के समर्थक कोई भी ऐसा सदैव असफल ही होने वाला प्रयास बराबर मत कीजिये अन्यथा आप जाने, आप के आश्रित और आप के छद्म श्रद्धा-भक्ति करने वाले स्वार्थी शिष्य जाने। >>>>>>>>>प्रयागराज में मौजूद हर जाति/सम्प्रदाय के अपने मामाजी और नानाजी व् भाई-बहनो विशेषकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनके अनुसांगिक/व्युत्पन्न जाति/सम्प्रदाय और विशेषकर रजस्व ब्राह्मण/कायस्थ और कूर्मावतारी समुदाय के माध्यम से श्रद्धेय गुरुदेव जी को सूचित करना चाहता हूँ की रामानन्द कुल और सारंगधर कुल ने ही इस संसार के विश्वजनमानस को सनातन हिन्दू संस्कृति ही मौलिक मानवीय संस्कृति है जिसका उद्गम स्थल/केंद्र प्रयागराज ही है की सिद्धि में जो भूमिका निभाई है उसको जितना ही पुनर्स्थापित/प्रतिस्थापित किया जाय उसका उतना ही प्रतिफल इस संसार को आने वाले युगों में इन दोनों कुलो से मिलता ही रहेगा जिसने की मेरी कुलदेवी, देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) के द्वारा स्वप्न में मेरे लिए अशुभ जाने के निर्देश के बावजूद अपने अतिसय प्रिय पुत्र/मानस पुत्र/शिष्य को 7 फरवरी, 2003 को आप के मानवता के संरक्षण/पुनर्जन्म, संपोषण, संवर्धन/उत्थान व् सतत संचलन हेतु इस प्रयागराज में संकल्पित किया और वह मानवता को समर्पित यज्ञ क्रमसः 29 मई , 2006; 11/18 सितंबर, 2007; 29 अक्टूबर, 2009 और 19 जुलाई, 2011 को क्रमिक रूप से सफल होते हुए 25 नवम्बर, 2016 को पूर्ण सफल हो गया।>>>>>>>>>> विशेष बात यह की रामानन्द कुल/व्यासी-गौतम गोत्रीय मिश्र सनातन ब्राह्मण कुल/बिशुनपुर-जौनपुर-223203 के कुलदेवता, महादेव शिव हैं और सारंगधर कुल/कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय सनातन ब्राह्मण कुल/रामापुर-आजमगढ़-223225 की कुलदेवी देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का एकल स्वरुप) हैं तो ये दोनों कुल और इस प्रकार दोनों गाँव एक दूसरे के अन्योन्य आश्रित है इसमें कोई प्रमाण की जरूरत नहीं है। तो ऐसे में अगर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) को रावनकुल को नामित कोई संस्थान/केंद्र/निर्माण स्वीकार नहीं है तो आप और आप के समर्थक कोई भी ऐसा सदैव असफल ही होने वाला प्रयास बराबर मत कीजिये अन्यथा आप जाने, आप के आश्रित और आप के छद्म श्रद्धा-भक्ति करने वाले स्वार्थी शिष्य जाने। >>>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम प्रयागरासे से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला:बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।