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Tuesday, September 27, 2016

कश्यप/मारीच (शब्द सह नामार्थ जिसका सूर्य=आदित्य=भानु=रवि=मित्र=खगा=पुष्ण=हिरण्यगर्भा=सवित (न की सविता जिसका अर्थ सूर्यपत्नी गायत्री होता है)=अर्क=भास्कर=सवितापति सूर्यनारायण) ही सातों सप्तर्षियों में सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं अगर इसमे आठवे ऋषी अगस्त्य=कुम्भज (अशोकचक्र=धर्मचक्र=समयचक्र=समतामूलकचक्र=कालचक्र के 8X3=24 ऋषि मतलब मूल विभाग 3 ही हुए हर ऋषि में जिसमे विश्वामित्र प्रथम और याज्ञवल्क चौबीसवें ऋषी हैं जबकी अब इन 24 ऋषि गोत्र से सुदर्शन चक्र की 108 धारीदार आरियों की तर्ज पर लगभग अधिकतम 108 गोत्र इस विश्व मानव समाज में हो चुके हैं। अतः अशोकचक्र और सुदर्शन चक्र समानार्थी हो जा रहे है यदि हम मूल 24 पर वापस आते हैं| इन चक्र/चक्रों के सदा सर्वदा धारणकर्ता भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् महादेव शिव है और इस प्रकार यहां भी ये एक दूसरे के इष्टदेव एक दूसरे से अन्योन्य सम्बन्ध में ही जुड़े हैं) को भी सामिल कर लिया जाय तो भी इस अष्टक ऋषि समूह में भी कश्यप/मारीच सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं :---- त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति भगवान् विष्णु (श्रीधर) को समर्पित "ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय" जिसमे स्वयं में ही लक्ष्मी, गायत्री और गीता (जिसमे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ज्ञान का सार समाहित है) समाहित हों और जो विष्णु समस्त देवी जगत के सबसे प्रिय देव और उनके सबसे बड़े मित्र है जिसमे ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति जो जगत के मूल स्रोत हैं और स्वयं उनकी सती:पारवती:गौरी:उमा:गिरिजा:अपर्णा: समेत अन्य सभी 13 पुत्रियाँ भी सामिल हैं (जिनसे कश्यप ने पिता मारीच के आदेश से उनके द्वारा ब्रह्मा को दिए वरदान को पूर्ण करने हेतु विवाह किया था जिनका विवाह शिव और सती:उमा:गिरिजा:अपर्णा प्रकरण के कारण रुका था)| जो विष्णु (श्रीधर) स्वयं में ही प्रदीप हो मतलब सूर्य की भी आंतरिक ऊर्जा का स्वयं निहित स्रोत है ((ॐ मरीचये (मारीच:कश्यप/मारीच)) नमः, ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये (रवि) नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, , ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ आदित्याय नमः, सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः|>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पार कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया|>>>>>>>>>>>>देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ( सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार।>>>>>>>>>>>>>> यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विशवास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=(सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

कश्यप/मारीच (शब्द सह नामार्थ जिसका सूर्य=आदित्य=भानु=रवि=मित्र=खगा=पुष्ण=हिरण्यगर्भा=सवित (न की सविता जिसका अर्थ सूर्यपत्नी गायत्री होता है)=अर्क=भास्कर=सवितापति सूर्यनारायण) ही सातों सप्तर्षियों में सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं अगर इसमे आठवे ऋषी अगस्त्य=कुम्भज (अशोकचक्र=धर्मचक्र=समयचक्र=समतामूलकचक्र=कालचक्र के 8X3=24 ऋषि मतलब मूल विभाग 3 ही हुए हर ऋषि में जिसमे विश्वामित्र प्रथम और याज्ञवल्क चौबीसवें ऋषी हैं जबकी अब इन 24 ऋषि गोत्र से सुदर्शन चक्र की 108 धारीदार आरियों की तर्ज पर लगभग अधिकतम 108 गोत्र  इस विश्व मानव समाज में हो चुके हैं।  अतः अशोकचक्र और सुदर्शन चक्र समानार्थी हो जा रहे है यदि हम मूल 24 पर वापस आते हैं| इन चक्र/चक्रों के सदा सर्वदा धारणकर्ता भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् महादेव शिव है और इस प्रकार यहां भी ये एक दूसरे के इष्टदेव एक दूसरे से अन्योन्य सम्बन्ध में ही जुड़े हैं) को भी सामिल कर लिया जाय तो भी इस अष्टक ऋषि समूह में भी कश्यप/मारीच सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं :---- त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति भगवान् विष्णु (श्रीधर) को समर्पित "ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय" जिसमे स्वयं में ही लक्ष्मी, गायत्री और गीता (जिसमे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ज्ञान का सार समाहित है) समाहित हों और जो विष्णु समस्त देवी जगत के सबसे प्रिय देव और उनके सबसे बड़े मित्र है जिसमे ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति जो जगत के मूल स्रोत हैं और स्वयं उनकी सती:पारवती:गौरी:उमा:गिरिजा:अपर्णा: समेत अन्य सभी 13 पुत्रियाँ भी सामिल हैं (जिनसे कश्यप ने पिता मारीच के आदेश से उनके द्वारा ब्रह्मा को दिए वरदान को पूर्ण करने हेतु विवाह किया था जिनका विवाह शिव और सती:उमा:गिरिजा:अपर्णा प्रकरण के कारण रुका था)| जो विष्णु (श्रीधर) स्वयं में ही प्रदीप हो मतलब सूर्य की भी आंतरिक ऊर्जा का स्वयं निहित स्रोत है ((ॐ मरीचये (मारीच:कश्यप/मारीच)) नमः, ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये (रवि) नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, , ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ आदित्याय नमः, सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः|>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पार कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया|>>>>>>>>>>>>देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ( सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार।>>>>>>>>>>>>>> यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विशवास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=(सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन  तिथि:  रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Monday, September 26, 2016

देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने "मानवता" और "सत्य" दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंसीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक/जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। >>>>>>>>>>जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती: गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: रविवार दिनांक 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने "मानवता" और "सत्य" दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंसीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक/जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ  को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। >>>>>>>>>>जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती: गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: रविवार दिनांक 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Sunday, September 25, 2016

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी (:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (बर्ह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल को ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज के सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी(:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी (:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (बर्ह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल  को ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज के सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी(:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Wednesday, September 21, 2016

एक सनातन पूर्ण ब्राह्मण का पुत्र पूरी दुनिया पर भारी पड़ा था और उसी से ही सुरक्षा के गुहार लगायी गयी थी प्रयागराज में स्थिर हो स्थिति को नियंत्रित करने हेतु सभी व्यवसायिक सेवावालों के पुत्रों/पुत्रियों के वस में कुछ नहीं था पर पुनः कुचक्र चलाया जा रहा है उसके विरुध्ध उसका भी परिणाम मिलेगा लेकिन उस समय यह आप लोगों के षडयंत्र के तहत ढाल बनकर आप की सुरक्षा नहीं करेगा वरन अबकी वार व्यवसायिक सेवा वालों के पुत्रों/पुत्रियों की बारी है जो कुछ भी कर जाय तो आप सब ठीक मान लेते है:->>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

एक सनातन पूर्ण ब्राह्मण का पुत्र पूरी दुनिया पर भारी पड़ा था और उसी से ही सुरक्षा के गुहार लगायी गयी थी प्रयागराज में स्थिर हो स्थिति को नियंत्रित करने हेतु सभी व्यवसायिक सेवावालों के पुत्रों/पुत्रियों के वस में कुछ नहीं था पर पुनः कुचक्र चलाया जा रहा है उसके विरुध्ध उसका भी परिणाम मिलेगा लेकिन उस समय यह आप लोगों के षडयंत्र के तहत ढाल बनकर आप की सुरक्षा नहीं करेगा वरन अबकी वार व्यवसायिक सेवा वालों के पुत्रों/पुत्रियों की बारी है जो कुछ भी कर जाय तो आप सब ठीक मान लेते है:->>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Tuesday, September 20, 2016

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया।>>>>>>>वैसे तो मैं सितंबर 2000 से ही इस प्रयागराज में उपस्थित हूँ 11 सितंबर, 2001 से यहां के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र, प्रयागराज विश्विद्यालय के अनुसंधान सहायक पद (अस्थायी पद) पर नियुक्त हुआ किन्तु अगर मेरा ज्येष्ठ व् वरिष्ठ इस प्रयागराज में मौजूद था तो फिर मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा, श्रीश्रीधर (विष्णु) और मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के माध्यम से फरवरी, 2003 में मुझे रोकने की युक्ती प्रयोग में क्यों लाई गयी। पारिवारिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के संघर्स के बावजूद जिस अवस्था में जाकर पूर्ण ब्राह्मण (व्यवसाय विहीन: व्यवसाय विहीन खेती परंतु वह भी आजीविका मात्र) पुत्र मैं स्वयं बचपन से विवाह तक आजीवन अखंड ब्रह्मचारी वापस लौट आया अपने लिए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ती के साथ वह इस जगत में किशी अन्य व्यक्ति से सम्भव नहीं है। मुझे जिस बड़े भाई के सहयोग हेतु उनकी गुरुता में कार्यरत रहने को कहा गया था वे स्वयं ही ऐसे कार्यपूर्ति में सक्षम नहीं थे जानकार लोगों को प्रमाण देने की जरूरत नहीं पर आम जन के लिए यह सत्य है की वे सतह पर सबसे अधिक क्रियाशील दिखाई दिए। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है की जो स्वयं विवेक है जिसका इस केंद्र स्थापना हेतु संकल्प हुआ उसको 2001 से 2014 तक अनगिनत घृणित उपाधी मिली इस प्रयागराज में और सबसे बड़ी बात की विवेक को ही "पागल" की उपाधी मिलती रही जो और किशी को नहीं मिली है जो इस केंद्र से सम्बंधित रहे है। और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया। >>>>>> आज के ठीक 19 वर्ष पूर्व एक शिक्षार्थी के साथ काशी/वाराणसी समूह में लिखित परिक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए भारतीय सैन्य शिक्षा दल (96 UP BN, NCC Jaunpur, Varanasi Group) का सैन्यसेवी (कैडेट) बना था मतलब क्षत्रिय स्वरुप को धारण किया था और तब से ही व्यापक मानव मूल्यों और राष्ट्रीय हित हेतु स्थापित सत्यगत तथ्य पर आंच करने वाले किशी भी व्यक्ति, व्यक्तिसमूह/राष्ट्र/राष्ट्र समूह के अधीन होकर न कोई कार्य किया हूँ और न करूंगा| जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मेरी दृष्टिगत दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता पर अवश्य पड़ा है अज्ञान लोगों के असहयोग करने से जबकी वास्तविक दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता मेरी संरक्षित ही है जिसमे किशी को प्रथम से द्वितीय बनाने का अवसर चाह कर भी नहीं मिल सकता तो लोग बेबस हैं। उनकी अज्ञानता इस लिए क्योंकि मेरी द्रीढ़ प्रतिज्ञा का अभीष्ठ लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय हित हेतु व् व्यापक मानव मूल्यों हेतु ही है। >>>>>>>>>>>>> की विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया।>>>>>>>वैसे तो मैं सितंबर 2000 से ही इस प्रयागराज में उपस्थित हूँ 11 सितंबर, 2001 से यहां के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र, प्रयागराज विश्विद्यालय के  अनुसंधान सहायक पद (अस्थायी पद) पर नियुक्त हुआ किन्तु अगर मेरा ज्येष्ठ व् वरिष्ठ इस प्रयागराज में मौजूद था तो फिर मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा, श्रीश्रीधर (विष्णु) और मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के माध्यम से फरवरी, 2003 में मुझे रोकने की युक्ती प्रयोग में क्यों लाई गयी। पारिवारिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के संघर्स के बावजूद जिस अवस्था में जाकर पूर्ण ब्राह्मण (व्यवसाय विहीन: व्यवसाय विहीन खेती परंतु वह भी आजीविका मात्र) पुत्र मैं स्वयं बचपन से विवाह तक आजीवन अखंड ब्रह्मचारी वापस लौट आया अपने लिए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ती के साथ वह इस जगत में किशी अन्य व्यक्ति से सम्भव नहीं है। मुझे जिस बड़े भाई के सहयोग हेतु उनकी गुरुता में कार्यरत रहने को कहा गया था वे  स्वयं ही ऐसे कार्यपूर्ति में सक्षम नहीं थे जानकार लोगों को प्रमाण देने की जरूरत नहीं पर आम जन के लिए यह सत्य है की वे सतह पर सबसे अधिक क्रियाशील दिखाई दिए। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है की जो स्वयं विवेक है जिसका इस केंद्र स्थापना हेतु संकल्प हुआ उसको 2001 से 2014 तक अनगिनत घृणित उपाधी मिली इस प्रयागराज में और सबसे बड़ी बात की विवेक को ही "पागल" की उपाधी मिलती रही जो और किशी को नहीं मिली है जो इस केंद्र से सम्बंधित रहे है। और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया। >>>>>> आज के ठीक 19 वर्ष पूर्व एक शिक्षार्थी के साथ काशी/वाराणसी समूह में लिखित परिक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए भारतीय सैन्य शिक्षा दल  (96 UP BN, NCC Jaunpur, Varanasi Group) का सैन्यसेवी (कैडेट) बना था मतलब क्षत्रिय स्वरुप को धारण किया था और तब से ही व्यापक मानव मूल्यों और राष्ट्रीय हित हेतु स्थापित सत्यगत तथ्य पर आंच करने वाले किशी भी व्यक्ति, व्यक्तिसमूह/राष्ट्र/राष्ट्र समूह के अधीन होकर न कोई कार्य किया हूँ और न करूंगा| जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मेरी दृष्टिगत दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता पर अवश्य पड़ा है अज्ञान लोगों के असहयोग करने से जबकी वास्तविक दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता मेरी संरक्षित ही है जिसमे किशी को प्रथम से द्वितीय बनाने का अवसर चाह कर भी नहीं मिल सकता तो लोग बेबस हैं। उनकी अज्ञानता इस लिए क्योंकि मेरी द्रीढ़ प्रतिज्ञा का अभीष्ठ लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय हित हेतु व् व्यापक मानव मूल्यों हेतु ही है। >>>>>>>>>>>>> की विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Wednesday, September 7, 2016

महादेवी ही तो आद्या मतलब आदिदेवी है मतलब महादेवी सरस्वती ही है कोई और देवी नहीं मतलब लक्ष्मी और पारवती:सती:गौरी (सरस्वती की पौत्री हैं) नहीं| सरस्वती की मानस सन्तान विवेक (संगत बहन प्रज्ञा) और ज्ञान(संगत बहन विद्या) हैं| सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक संतान काशिराज दक्ष प्रजापति हैं जिनकी पुत्री हैं सती:पारवती:गौरी। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||


महादेवी ही तो आद्या मतलब आदिदेवी है मतलब महादेवी सरस्वती ही है कोई और देवी नहीं मतलब लक्ष्मी और पारवती:सती:गौरी (सरस्वती की पौत्री हैं) नहीं| सरस्वती की मानस सन्तान विवेक (संगत बहन प्रज्ञा) और ज्ञान(संगत बहन विद्या) हैं| सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक संतान काशिराज दक्ष प्रजापति हैं जिनकी पुत्री हैं सती:पारवती:गौरी। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||