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Wednesday, August 16, 2017

जिसने एक सामान्यजन से लेकर मानवता के इतिहास में उद्भावित हर विभूतियों जिसमे अबतक हुए मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (राम/कृष्ण) तक की अवश्था का भी आचरण संयोगी/समहृदयी जन के प्रतिकूल आचरण के बाद भी सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका और उसके संक्रमण काल और उसके उत्तर काल में अपने को इसी प्रयागराज में केंद्रित करते हुए किया है उसकी कलम से:------------राधा वह है जो अपने प्रिये के अभीस्त लक्ष्य के प्राप्ति में बाधा न बनने हेतु भौतिक रूप से साथ तो छोड़ दे पर आध्यात्मिक और मानशिक रूप से कृष्ण का ही होकर इस प्रकार रहे ही राधा और कृष्ण में कोई भेद न रह जाय या दोनों इस तरह से एक दूसरे में समाहित हो की उनमे कोई अन्तर ही न रह जाय? और अपने पिता बृषभान के दबाव वस् शादी करे भी तो प्रिये कृष्ण के समान सामाजिक परिश्थितियों वाले (यशोदा के ही रिश्तेदार या अन्य ग्वाले "रायन" से ) से जिससे की प्रिये कृष्ण पर कोई अन्य समाज छीटा काशी भी न कर सके। ऐसी राधा और कृष्ण भारतीय समाज में बहुत से उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने वालों में से हैं। याद रहे इस अवस्था तक कृष्ण स्वयं किशी के यहाँ पनाह लिए हुए थे और पाले पोसे गए थे पर उनके माता-पिता वाशुदेव और देवकी सामान्य जन भी न हो कर एक वंदी थे जिनका सब कुछ कंश के कब्जे में था और उन्ही को छुडाने हेतु मथुरा जाने पर राधा का विवाह रायन से कर दिया गया। कृष्ण कंश वधकरने में सफल भी हुए और फिर नन्द गाँव छोड़ कर पिता के साथ ही चले गए| अतः कृष्ण भी इस अवस्था तक बहुत धनी या भाग्यशाली नहीं कहे जा सकते जिनके जीवन पर भी संकट के बादल बचपन से ही थे और एक-एक कर वे उसे समाप्त करते रह गए इस अवस्था तक।-------------और सीता वह हैं जो अत्यंत पतिव्रता है और पति के साथ जंगल भी जाती हैं और हरण हो जाने पर भी पति के सिवा किशी अन्य को स्वप्न में भी नहीं सोच सकती हैं इसके लिए अग्नि परिक्षा भी देकर सफल निकलती हैं विश्व के सर्व शक्तिमान और सर्व सम्म्पन्न रावण से शादी करने की बात तो दूर। और प्रजापालन में पति के नीतिगत निर्णय और आदर्शो की रक्षा के तहत अपना वनगमन/विछोह/पृथकता की स्वीकारोक्ति भी करे स्वयं प्रामाणिक रूप से सत्य साबित करते हुए भी| ----------------पार्वती की पतिव्रता के बारे में तो कहना ही क्या जो पति का अपमान देख स्वयं को अग्नी में अर्पित कर देती हैं पिता के ही यज्ञ में और पति को छोड़ने की बात ही क्या और यही स्थित लक्ष्मी और सरस्वती की है क्रमशः विष्णु और ब्रह्मा के साथ। इसी क्रम में सती दुर्वाशा ऋषि/कृष्णात्रेय की माँ सती-ईस्ट, अनुसूइया का क्या कहना है जो तीनो देवियों (लक्ष्मी। सरस्वती और पार्वती ) से भी एक कदम आगे निकली पतिव्रता में। मै स्वयं इस बात का प्रमाण हूँ की आज भी इस तरह के पुरुष हैं भारतवर्ष में पर देवियों की कमी हो रही हैं हर क्षेत्र में एक सामान्य किशान से लेकर एक बहुत बड़े ऋषि महर्षि, श्रेष्ठतम उद्यमी और सेनाध्यक्ष तक के लिए इन राधा, सीता, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती और अनुसूइया जैसे जीवन संगिनियों का आचरण कर पाने के लिए। ---किशी भी स्त्री या पुरुष की भौतिकवादी मंशिकता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है वरन हमारे अंदर दूर्द्रिस्ती की कमी है की हम नैतिकता को भूले जा रहे हैं और कर्त्तव्य परायणता से दूर हट रहे हैं की कोई दूसरा हमारी कमियों पर से पर्दा न उठाये, अतः हम किशी को पागल सिध्ध कर मलाईदार स्थान पर बने रहें और क़ानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर सत्य से बचते रहें पर यह कुछ ही समय तक संभव है। क्योंकि भारत के संविधान के ऊपर भी एक संविधान है और वह है "सत्यमेव जयते का संविधान" और जो व्यक्ति इस पर विशवास करता है उसे दुनिया की कोई शक्ति जमींदोज नहीं कर सकती हैं और इसीलिए भारत भी जमींदोज नहीं किया जा ।----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।

जिसने एक सामान्यजन से लेकर मानवता के इतिहास में उद्भावित हर विभूतियों जिसमे अबतक हुए मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (राम/कृष्ण) तक की अवश्था का भी आचरण संयोगी/समहृदयी जन के प्रतिकूल आचरण के बाद भी सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका और उसके संक्रमण काल और उसके उत्तर काल में अपने को इसी प्रयागराज में केंद्रित करते हुए किया है उसकी कलम से:------------राधा वह है जो अपने प्रिये के अभीस्त लक्ष्य के प्राप्ति में बाधा न बनने हेतु भौतिक रूप से साथ तो छोड़ दे पर आध्यात्मिक और मानशिक रूप से कृष्ण का ही होकर इस प्रकार रहे ही राधा और कृष्ण में कोई भेद न रह जाय या दोनों इस तरह से एक दूसरे में समाहित हो की उनमे कोई अन्तर ही न रह जाय? और अपने पिता बृषभान के दबाव वस् शादी करे भी तो प्रिये कृष्ण के समान सामाजिक परिश्थितियों वाले (यशोदा के ही रिश्तेदार या अन्य ग्वाले "रायन" से ) से जिससे की प्रिये कृष्ण पर कोई अन्य समाज छीटा काशी भी न कर सके। ऐसी राधा और कृष्ण भारतीय समाज में बहुत से उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने वालों में से हैं। याद रहे इस अवस्था तक कृष्ण स्वयं किशी के यहाँ पनाह लिए हुए थे और पाले पोसे गए थे पर उनके माता-पिता वाशुदेव और देवकी सामान्य जन भी न हो कर एक वंदी थे जिनका सब कुछ कंश के कब्जे में था और उन्ही को छुडाने हेतु मथुरा जाने पर राधा का विवाह रायन से कर दिया गया। कृष्ण कंश वधकरने में सफल भी हुए और फिर नन्द गाँव छोड़ कर पिता के साथ ही चले गए| अतः कृष्ण भी इस अवस्था तक बहुत धनी या भाग्यशाली नहीं कहे जा सकते जिनके जीवन पर भी संकट के बादल बचपन से ही थे और एक-एक कर वे उसे समाप्त करते रह गए इस अवस्था तक।-------------और सीता वह हैं जो अत्यंत पतिव्रता है और पति के साथ जंगल भी जाती हैं और हरण हो जाने पर भी पति के सिवा किशी अन्य को स्वप्न में भी नहीं सोच सकती हैं इसके लिए अग्नि परिक्षा भी देकर सफल निकलती हैं विश्व के सर्व शक्तिमान और सर्व सम्म्पन्न रावण से शादी करने की बात तो दूर। और प्रजापालन में पति के नीतिगत निर्णय और आदर्शो की रक्षा के तहत अपना वनगमन/विछोह/पृथकता की स्वीकारोक्ति भी करे स्वयं प्रामाणिक रूप से सत्य साबित करते हुए भी| ----------------पार्वती की पतिव्रता के बारे में तो कहना ही क्या जो पति का अपमान देख स्वयं को अग्नी में अर्पित कर देती हैं पिता के ही यज्ञ में और पति को छोड़ने की बात ही क्या और यही स्थित लक्ष्मी और सरस्वती की है क्रमशः विष्णु और ब्रह्मा के साथ। इसी क्रम में सती दुर्वाशा ऋषि/कृष्णात्रेय की माँ सती-ईस्ट, अनुसूइया का क्या कहना है जो तीनो देवियों (लक्ष्मी। सरस्वती और पार्वती ) से भी एक कदम आगे निकली पतिव्रता में।
मै स्वयं इस बात का प्रमाण हूँ की आज भी इस तरह के पुरुष हैं भारतवर्ष में पर देवियों की कमी हो रही हैं हर क्षेत्र में एक सामान्य किशान से लेकर एक बहुत बड़े ऋषि महर्षि, श्रेष्ठतम उद्यमी और सेनाध्यक्ष तक के लिए इन राधा, सीता, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती और अनुसूइया जैसे जीवन संगिनियों का आचरण कर पाने के लिए। ---किशी भी स्त्री या पुरुष की भौतिकवादी मंशिकता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है वरन हमारे अंदर दूर्द्रिस्ती की कमी है की हम नैतिकता को भूले जा रहे हैं और कर्त्तव्य परायणता से दूर हट रहे हैं की कोई दूसरा हमारी कमियों पर से पर्दा न उठाये, अतः हम किशी को पागल सिध्ध कर मलाईदार स्थान पर बने रहें और क़ानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर सत्य से बचते रहें पर यह कुछ ही समय तक संभव है। क्योंकि भारत के संविधान के ऊपर भी एक संविधान है और वह है "सत्यमेव जयते का संविधान" और जो व्यक्ति इस पर विशवास करता है उसे दुनिया की कोई शक्ति जमींदोज नहीं कर सकती हैं और इसीलिए भारत भी जमींदोज नहीं किया जा ।----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

हमें विदेशिओं का पोषक/तन्त्र/संशाधन बनने या बनाने के लिए दशकों से जारी आतंरिक नश्लीय संघर्ष के जल प्रवाह को भारत में पूर्णतः बन्द किया जाय जिसकी ओट में अनेकोनेक लोग अपना स्वार्थ्य सिद्ध करते हुए लोगों के मान-अपमान का अपना व्यापार जारी रखें हैं|-------------क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|

हमें विदेशिओं का पोषक/तन्त्र/संशाधन बनने या बनाने के लिए दशकों से जारी आतंरिक नश्लीय संघर्ष के जल प्रवाह को भारत में पूर्णतः बन्द किया जाय जिसकी ओट में अनेकोनेक लोग अपना स्वार्थ्य सिद्ध करते हुए लोगों के मान-अपमान का अपना व्यापार जारी रखें हैं|-------------क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|

क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Saturday, August 12, 2017

पुनः सनातन धर्मी संसार के युग की आहट

उस युग का इन्तजार है जब हम सब समस्त मानवता के सभी धर्मावलम्बी अपनी वास्तविकता से परिचित हो स्वतः सनातन धर्म के माध्यम से अपना जीवन सन्चालित करेंगे|

इस संसार से सभी नकाब/पर्दा उठावा तो दूं पर मुझे यह संदेह है इससे सभी शूर्य निस्तेज न हो जायें जो पहले से ही ओज विहीन हो गए है केवल ओस से प्रभावित हो। अतः पर्दा न उठाओ परदे में रहने दो। यह लाज का आवरण हटा तो फिर क्या होगा यह मेरे जैसे लोगों को ही पता है या बहुत अनुभवियों को पता है। अतः कुछ तो सरम की जाय जादा टीका टिप्पणी कम से कम अब बंद हो जाय अपनी नाकामियों को छुपाने के। अंत में मई यही कहूंगा की इस वैश्विक संसार में हिन्दू और उसके सहयोगी, मुस्लिम और उसके सहयोगी तथा इसाइयत और उसके सहयोगी संसार संचालन की आवश्यकता है और परस्पर अनंयोआश्रित है एक दूसरे पर। अतः एक दूसरे का सम्मान करना सीखें।

इस संसार से सभी नकाब/पर्दा उठावा तो दूं पर मुझे यह संदेह है इससे सभी शूर्य निस्तेज न हो जायें जो पहले से ही ओज विहीन हो गए है केवल ओस से प्रभावित हो। अतः पर्दा न उठाओ परदे में रहने दो। यह लाज का आवरण हटा तो फिर क्या होगा यह मेरे जैसे लोगों को ही पता है या बहुत अनुभवियों को पता है। अतः कुछ तो सरम की जाय जादा टीका टिप्पणी कम से कम अब बंद हो जाय अपनी नाकामियों को छुपाने के। अंत में मई यही कहूंगा की इस वैश्विक संसार में हिन्दू और उसके सहयोगी, मुस्लिम और उसके सहयोगी तथा इसाइयत और उसके सहयोगी संसार संचालन की आवश्यकता है और परस्पर अनंयोआश्रित है एक दूसरे पर। अतः एक दूसरे का सम्मान करना सीखें।<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं|

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं| <<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Friday, August 11, 2017

कृष्ण

कृष्ण=शरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरूप मे ब्रह्मा+विष्णु+महेश)<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|